भजन संग्रह प्रथम भाग : घनश्यामदास जालान | Bhajan Sangarah pratham bhag : Ghanshyamdas Jalan

भजन संग्रह प्रथम भाग : घनश्यामदास जालान | Bhajan Sangarah pratham bhag : Ghanshyamdas Jalan

भजन संग्रह प्रथम भाग : घनश्यामदास जालान | Bhajan Sangarah pratham bhag : Ghanshyamdas Jalan के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : भजन संग्रह प्रथम भाग है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Ghanshyamdas Jalan | Ghanshyamdas Jalan की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 2.5MB है | पुस्तक में कुल 228 पृष्ठ हैं |नीचे भजन संग्रह प्रथम भाग का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | भजन संग्रह प्रथम भाग पुस्तक की श्रेणियां हैं : music

Name of the Book is : Bhajan Sangarah pratham bhag | This Book is written by Ghanshyamdas Jalan | To Read and Download More Books written by Ghanshyamdas Jalan in Hindi, Please Click : | The size of this book is 2.5MB | This Book has 228 Pages | The Download link of the book "Bhajan Sangarah pratham bhag" is given above, you can downlaod Bhajan Sangarah pratham bhag from the above link for free | Bhajan Sangarah pratham bhag is posted under following categories music |


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पुस्तक का साइज : 2.5MB
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राग केदारा बंद चरन सरोज तुम्हारे । जे पदपदुम सदासिवके धन
सिंधुसुता उरतें नहिं टारे । जे पदपदुम परसि भई पावन
सुरसरि दरस कटत अव भारे । ने पदपदुम परसि ऋषि-पत्नी,
बलि, नृग, व्याध, पतित बहु तारे ।। 3 पदपदुम रमत वृंदावन
अहि सिर धरि अगनित रिपु मारे। जे पदपदुम परसि ब्रज-भामिनि
सरबसु दै सुत सदन बिसारे ॥ जे पदपदम रमत पांडव-दल
|दत भये सब काज सँवारे । मूरदास तेई पदपंकज
त्रिविध ताप दुख-हरन हमारे ।।

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