सुभाषिता रत्ना संदोहा : अमित गाटी | The Subhashita Ratna Sandoha : Amit Gati

सुभाषिता रत्ना संदोहा : अमित गाटी | The Subhashita Ratna Sandoha : Amit Gati

सुभाषिता रत्ना संदोहा : अमित गाटी | The Subhashita Ratna Sandoha : Amit Gati के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : सुभाषिता रत्ना संदोहा है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Amit Gati | Amit Gati की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 28.9MB है | पुस्तक में कुल 458 पृष्ठ हैं |नीचे सुभाषिता रत्ना संदोहा का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | सुभाषिता रत्ना संदोहा पुस्तक की श्रेणियां हैं : others

Name of the Book is : The Subhashita Ratna Sandoha | This Book is written by Amit Gati | To Read and Download More Books written by Amit Gati in Hindi, Please Click : | The size of this book is 28.9MB | This Book has 458 Pages | The Download link of the book "The Subhashita Ratna Sandoha" is given above, you can downlaod The Subhashita Ratna Sandoha from the above link for free | The Subhashita Ratna Sandoha is posted under following categories others |


पुस्तक के लेखक :
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पुस्तक का साइज : 28.9MB
कुल पृष्ठ : 458
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जाते यत्र न राष्ट्रकूटतिलके सपनूरामणी
गुवा तुष्टिस्थाखिलस्य जगतः मुस्वामिनि प्रत्यहम् । सत्यं सत्यानात प्रशासति सति क्षमामासमुद्रान्तिका
मामीडर्मपरे गुणामृतनिधौ मत्यव्रताधिउि ॥ रक्षता येन निःशेषं चतुर-भोचिसंयुतम् ।। राज्यं धर्मण लोकानां कृता तुष्टः परा ६ ॥ तस्यात्मनो जगाते सुरमथितारुकीत
गोविन्दराज इति गोललामभूतः । त्यागी पराक्रमचनः प्रकटताप
संतापिताहितननो जनपभोऽभूत् ॥ पृथ्वी वल्लभ इति व मथितं यस्यापरं नगति नाम । वैश्चतुरुदचसीमामेको वनुवां वशे च ॥ एकोऽनेकनरन्द्रबृन्दसहितान्चस्तान्ममरताना
प्रोत्सातासिताप्रहारविधुरामा महामंयुगे । लक्ष्मीमच्याला नकार विलमत्सचामरहि
संसदद्रुवप्रसअनसुइन्धुपभोग्या भुते ॥ तत्पुत्रौत्र गते नाकमाकम्पितरपुत्रने ।
महाराजशवरूपः ख्याती रानाभवद्गणैः ॥ अधिषु यथार्थतां यः समभाटकलाप्तिब्यतोगेषु । वृद्धि निनाय परमार्ममाघर्षाभिधानस्य ॥ रानाभूतांपतृव्यो रिपुभवति भइत्यभावैकहे
लक्ष्मीवानिन्द्रराजो गुणिनृपनिकरान्त श्रमकारका । रागादन्याम्ब्वेदस्य प्रकटितविपन्या यं नृपान्माना
राज्यश्रीरच चके मकलकविननाद्गीततथ्ययभावम् ॥ १, धूवराजस्य, २, उन्होनइथिती पाहः. 'वयम्वमीमा' नः कः, ३. ५ व दक्षिणेश राणे कान्, तर्ण इतिहास प्रश्व्यम्, ४. मे। इति शस्य रामान्तरम्. ५. असे अपमान इन्द्रराशी गुजगदेरे में रान.

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