औरंगजेब | Aurangjeb

औरंगजेब हिंदी पुस्तक पीडीऍफ़ में | Aurangjeb hindi book in pdf

औरंगजेब हिंदी पुस्तक पीडीऍफ़ में | Aurangjeb hindi book in pdf के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : औरंगजेब है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Yadunath Sarkar | Yadunath Sarkar की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 23.38 MB है | पुस्तक में कुल 470 पृष्ठ हैं |नीचे औरंगजेब का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | औरंगजेब पुस्तक की श्रेणियां हैं : Stories, Novels & Plays, Uncategorized

Name of the Book is : Aurangjeb | This Book is written by Yadunath Sarkar | To Read and Download More Books written by Yadunath Sarkar in Hindi, Please Click : | The size of this book is 23.38 MB | This Book has 470 Pages | The Download link of the book "Aurangjeb" is given above, you can downlaod Aurangjeb from the above link for free | Aurangjeb is posted under following categories Stories, Novels & Plays, Uncategorized |


पुस्तक के लेखक :
पुस्तक की श्रेणी : ,
पुस्तक का साइज : 23.38 MB
कुल पृष्ठ : 470

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प्रकाडाकका वक्तव्य इतिहासाचार्य सर यदुनाथ सरकार कृत ए शाटं हिस्ट्री आफ़ औरंग- जेब का यह सशोधित सक्षिप्त हिन्दी संस्करण हिन्दी संसारको भेट करते हुए हमें विशेष हुष॑ होता है । औरगजेबकी जीवनी तथा उसके शासन- कालके भारतीय इतिहासका सरविस्तार अध्ययन करनेमें इस अस्सी-वर्षीय तपस्वीने पुरे पच्चीस वर्ष ( १९ ००-१९.२४ ई० ) तक अथक परिश्रम किया था । तदथं अत्यावस्यक आधार-ग्रन्थों तथा अन्य ऐतिहासिक सामग्रीको एकत्र करनेमें उन्होंने कोई बात नहीं उठा रखी थी । यही कारण था कि मोटी-मोटी पॉच जिल्दोंमें प्रकाशित उनका लिखा हुआ औरंगज़ेबका इति- हास तबसे ही एक प्रामाणिक इतिहास-ग्रन्थ मान लिया गया है । इधर इन पिछले पच्चीस वर्षोमें औरंगजेज या उसके शासन-काल सम्बन्धी जो भी नई सामग्री यदा-कदा प्राप्त होती रही है उसका भी समुचित उपयोग कर ने समय-समयपर अपने ग्रन्थमें आवइ्यक सुधार भी करते रहे है। पुन स हिन्दी संस्करणको तैयार करवाते समय उन्होंने आज तककी सारी पिछली खोजोका साराश भी उसमे सम्मिलित्त कर उसे स्वथा प्रामाणिक और आधुनिकतम बना दिया है। यो औरंगजेब सम्बन्धी उनकी इन पिछले साठ चूर्घोकी समस्त सुक्ष्पतम खोजों गहरे अध्ययन तथा गम्भीर चिन्तन- का परिणाम हमसे इस हिन्दी ग्रन्थ-रत्तमें एकत्र देखनेको मिलता है । सर यदुनाथके इतिहास-ग्रत्थ सवंधा प्रामाणिक तथा घटनाओसे परि- पूर्ण होते है तथापि उनमे कही नीरसता नही आने पाई है। उनकी लेखन- दोली इतनी रोचक हैं कि उनके ग्रन्थोमे उपन्यासकी-सो सरसता मिलती है और पाठक बिना रुके प्रारम्भ से अन्त तक उन्हे बराबर पढ़ता ही जाता है। अपने प्रमुख तायककी जीवनीका इतना सजीव वर्णन लिखने पर भी सर यदुनाथके विवरण तथा विवेचन से उसके प्रति या विरुद्ध किसी प्रकार का पक्षपात या कोई असतुलित भावना देखनेको नहीं मिलती है । जिस स्पष्टताके साथ वे उसके गुणों तथा सफलताओंका उल्लेख करते है उसी तत्परता और विस्तारके साथ उसकी त्रुटियों और भूलोंको भी वे अपने पाठकोंके सम्मुख खोलकर रख देते है। अपने शासन-क्रालके अन्तिम वर्षो- में अदूष्ट कठोर नियतिके साथ अन्त तक लगातार दृढतापूवंक जूझते हुए

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