हिंदी वीरकाव्य | Hindi Veerkavya

हिंदी वीरकाव्य : टीकम सिंह तोमर हिंदी पुस्तक | Hindi Veerkavya : Tikam Singh Tomar Hindi Book

हिंदी वीरकाव्य : टीकम सिंह तोमर हिंदी पुस्तक | Hindi Veerkavya : Tikam Singh Tomar Hindi Book के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : हिंदी वीरकाव्य है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Tikam Singh Tomar | Tikam Singh Tomar की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 48.86 MB है | पुस्तक में कुल 413 पृष्ठ हैं |नीचे हिंदी वीरकाव्य का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | हिंदी वीरकाव्य पुस्तक की श्रेणियां हैं : education, history

Name of the Book is : Hindi Veerkavya | This Book is written by Tikam Singh Tomar | To Read and Download More Books written by Tikam Singh Tomar in Hindi, Please Click : | The size of this book is 48.86 MB | This Book has 413 Pages | The Download link of the book "Hindi Veerkavya" is given above, you can downlaod Hindi Veerkavya from the above link for free | Hindi Veerkavya is posted under following categories education, history |


पुस्तक के लेखक :
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पुस्तक का साइज : 48.86 MB
कुल पृष्ठ : 413

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(मे विभाग परयाग विशवविदयालय हैं। इस निबंध .के ऐतिहासिक झवययन को वतमान रूप देने में छापने दी मेरा पथ-निरदेश किया है। खोज काल में उकत डाकटर साहब सदैव दि भाव से मेरी सहायता करते रहे हैं। इसके लिए मैं झापका हृदय से कृतजन हू । .... इसके अतिरिकत परयाग विशवविदयालय के संसकृत-विभाग के अधयकष डा० बाबूराम सकसेना एमं० ए० डी० लिट‌० तथा. डा० रामकुमार वरमा एम० ए० पी-एच० डी० रोडर हिंदी विभाग के परति आभार परदरशित करना भी मेरा परम कतंबय है कयोंकि. शाप महानुभावों से समर समय पर मुझे उचित सुझाव एवं परामश मिलते रहे हैं । साथ दी डा० मातापरसाद जी गुपत रम० ए० डी० लिट‌ रीडर हिनदी-विभाग से भी मुभे सदैव परयापत सददायता मिलती रही है। तिथियों की गणना करने में छापने मेरी विशेष रूप से सददायता की दै जिसके लिए में शरापको दारदिक घनयवाद देता हूँ। हिंदी के परसिदध महाकवि पदुमाकर के जयपुर निवासी बंशरजों के परति आभार परदरशित करना भी में अपना पुनीत कतवय सममता हूँ जिनहोंने पदूमाकर संबंधी संपूरण अपरकाशित सामगरी मुके दिखाने की कृपा की । . इसके अतिरिकत सपुनिसपल मयुजधियम मयांग हिंदी साहितय सममेलन परयाग काशी नागरी परचारिणी सभा तथा महाराजाज पढलिक लाइनरेरी जयपुर के परबनधकों एवं झधिकारियों के परति में कृतजञवा परकाशित करता हूँ जिनहोंने वहाँ जाने पर उपयोगी सामपरी देखने की अजुमति एयं सुविधायें परदान करने की कृपा की । उन लेखकों के परति भी में भारी हूँ जिनकी अमूलय कृतियों से मेंते लाभ उठाया है । कि _ साथ दी मैं बलवंत राजपूत कॉलेज आगरा की परबंघ-समिति आनरेरी सेकरेटरी राव कृषणपाल सिंह ॉव‌ अवागढ़ परिंसिपल रामकरणुसिंह एम० ए० डी० एड० (हावड) तथा शो पी० सी० गोसवामी परिंसिपल बलबंत राजपूत हाई सकूल आगरा के परति कृतजञता परदरशित करता हूँ जिनहोंने दो वरष से झधिक समय का अवकार सवीकार करने की कपा की जिससे मैं परयाग विशवविदयालय में रहकर इस काये को संपनन कर सका । चिजयादशमी २०११ वि० टीकमसिंह तोमर बलवत राजपूत कॉलेज झायरा |

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