कलिंग का राजकुमार | Kaling Ka Rajkumar

कलिंग का राजकुमार हिंदी पुस्तक पीडीऍफ़ में | Kaling Ka Rajkumar hindi book in pdf

कलिंग का राजकुमार हिंदी पुस्तक पीडीऍफ़ में | Kaling Ka Rajkumar hindi book in pdf के बारे में अधिक जानकारी :

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पुस्तक का साइज : 1.68 MB
कुल पृष्ठ : 49

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कलिंग का राजकुमार पुरुषोततमदेव बहुत दिनों से योजना बना रहा था कि वह देशाटन के लिए जायेगा । पूरे भारत का भरमण करेगा । वह अनुभव परापत करेगा। आखिर उसकी योजना बन गयी और वह जाने की तैयारी करने लगा। कलिंग नरेश ने अपने राजकुमार के साथ सेना की एक छोटी-सी टुकडी कर दी। इनमें अंग रंकषक थे हाथी और घोड़े भी थे। रथों के अतिरिकत पैदल सैनिक भी थे। राजकुमार की यातरा आरमभ हो गयी। सबसे आगे कलिंग की राजय पताका फहरा रही थी। पीछे बाजे बज रहे थे । राजकुमार शवेत अरबी घोड़े पर सवार था। इस घोड़े के कलंगी बंधी थी। इसके माधे पर हीरे जवाहरातों का साज था। इस सपंदन के गले में खूब मोटी और चौड़ी सोने की जंजीर पड़ी थी। जिस पर गंगा-जमुनी का काम हो रहा था। इस घोड़े को उडन बछेड़ा कहा जाता । वह दुलकी चाल चलता । इसके टाप जब धरती पर बजते तो सुनने वाले मुगध हो जाते । घोड़े के चारों पैरों में सोने की झांझरें पहनाईं गरयी थीं । उनमें घुंघरू थे जो गति के साथ मधुर सवर में बजते थे। इस घोडे की चाल का एक नया अनदाज था । यह अपने सवामी के 5

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