शिव महापुराण | Shiv Mahapuraan

शिव महापुराण हिंदी पुस्तक | Shiv Mahapuraan Hindi Book

शिव महापुराण हिंदी पुस्तक | Shiv Mahapuraan Hindi Book के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : शिव महापुराण है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Unknown | Unknown की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 49.21 MB है | पुस्तक में कुल 812 पृष्ठ हैं |नीचे शिव महापुराण का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | शिव महापुराण पुस्तक की श्रेणियां हैं : dharm, hindu, Uncategorized

Name of the Book is : Shiv Mahapuraan | This Book is written by Unknown | To Read and Download More Books written by Unknown in Hindi, Please Click : | The size of this book is 49.21 MB | This Book has 812 Pages | The Download link of the book "Shiv Mahapuraan" is given above, you can downlaod Shiv Mahapuraan from the above link for free | Shiv Mahapuraan is posted under following categories dharm, hindu, Uncategorized |


पुस्तक के लेखक :
पुस्तक की श्रेणी : , ,
पुस्तक का साइज : 49.21 MB
कुल पृष्ठ : 812

Search On Amazon यदि इस पेज में कोई त्रुटी हो तो कृपया नीचे कमेन्ट में सूचित करें |
पुस्तक का एक अंश नीचे दिया गया है : यह अंश मशीनी टाइपिंग है, इसमें त्रुटियाँ संभव हैं, इसे पुस्तक का हिस्सा न माना जाये |

ही मेरे गुरु आप ही माता और आप युक्त हु चर ब्रा्मण- पिता हैं। आपकी दारणमें आयी हुई सुझ देवताके दोनों खरणोंमें गिर पड़ी । तब उन दीन अवलाका आप ही उद्धार कीजिये बुद्धिमान ग्राह्णने कृपापूर्वक उसे उठाया ुतगी कहते हैं--शौनक ! इस प्रकार (अध्याय २-३) क चश्चुलाकी प्रार्थनासे ब्राह्मणका उसे पूरा शिवपुराण सुनाना और समयानुसार शरीर छोड़कर शिवल्प्रेकमें जा चश्ुलाका पार्वतीजीकी सखी एवं सुखी होना बाहाण बोले---नागी ! सौभाग्यकी बात क्योंकि सतरपोने सगा यापोकी सुदधिके है. कि. भगवान शंकरकी . कृपासे लिये जैसे आ्रायक्षितका उपदेश किया है तह जूस वैराग्यवुक्त कबाकों सब पक्षासापसं सम्पत् हो जाता है। जो सुनकर तुमे समयपर चेत हों गया हैं। पुरुष विधिपूर्णक प्राथक्षिण करके निर्भय हो आहाणपत्री ! तुम दरों पत। भगवान जाला है पर अपने कुकर्मके किये पश्चासाथ सिवकी शारणमें जाओं। फियकी कृपासे नहीं करता उसे प्राय उत्तष गति नहीं प्राप्त साल कमककाद न सेल जैक कण यह सर अब दंकनर इक भगवान दिवकी कौर्तिकथास युक्त उस पश्चासाय अवदथ उत्तप? परम बसुका वर्णन करेगा जिससे तुपें धारण गा है. उसमें संझाय न्ें। इस सदा सुख देनिवाली उन गलि प्राप्न सेमी ।. शिवपुराणक कबा सुननेसे फंसी जितशुदधि शिवकी उत्तम कथा सुमनेसे ही तुकारी चूदधि कोती है वैसी दूसरे उपायों नहीं होती। जैसे इस तरह पशाच्यसे सुक्त एवं खुद्ध हो गयी. र्पण साफ करनेपर निर्मकत हो जाता है है। साथ ही तुम्हारे मनमें लिधयोंके प्रलि प्रकार इस सियपुराणकी फथासे चित्त बैक ते गम है। उतर ही साथ भनन ख हे जाम केश नी जड़ा है। सदुष्योंकि शुद्धचिसयें जगदप्या पार्वती- जयक्षित हैं। ससुस्योरे सबके किये सहित भगयार फिय विराजमान राते हैं। पशाताप यस्कूछी पाक निम्ृक्ि पत । समेंकं स्थित सकि सर्वज्पवि्रीघतम॥ जाते शुद्धि आवक करेति रू । ययोपदि्ट सब्र 0! (कसकुवन-साहात्य अ ३ उसोक ५६)

You might also like

Leave A Reply

Your email address will not be published.