अगस्त्य संहिता | Agastya Sanhita

अगस्त्य संहिता | Agastya Sanhita

अगस्त्य संहिता | Agastya Sanhita के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : अगस्त्य संहिता है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Mahaveer Prasad Mishra | Mahaveer Prasad Mishra की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 15.3 MB है | पुस्तक में कुल 111 पृष्ठ हैं |नीचे अगस्त्य संहिता का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | अगस्त्य संहिता पुस्तक की श्रेणियां हैं : dharm, hindu

Name of the Book is : Agastya Sanhita | This Book is written by Mahaveer Prasad Mishra | To Read and Download More Books written by Mahaveer Prasad Mishra in Hindi, Please Click : | The size of this book is 15.3 MB | This Book has 111 Pages | The Download link of the book "Agastya Sanhita" is given above, you can downlaod Agastya Sanhita from the above link for free | Agastya Sanhita is posted under following categories dharm, hindu |


पुस्तक के लेखक :
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पुस्तक का साइज : 15.3 MB
कुल पृष्ठ : 111

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एक बार महातेजस्वी और महातपस्वी ब्रह्मर्षि अगस्त्य जी श्री सुतीक्ष्ण मूनि के आश्रम में पधारे। सुतीक्ष्ण मुनि ने उनका यथोचित आदर सत्कार करके संसार से मुक्ति पाने का माग जानने की याचना की। महाप्रतापी अगस्त्य जी ऐसे सिद्ध महात्मा थे कि देवताओं के आग्रह से उन्होंने समुद्र को आचमन करके सोख लिया था। जिस समय राजा नहुष इन्द्र हो गये तब वह ऋषियों द्वारा उठायी हुई पालकी में बैठकर निकले थे, उन ऋषियों में अगस्त्य जी भी पालकी उठाये हुए थे। अचानक राजा नहुष का पैर महर्षि अगस्त्य जी के शरीर से छ, गया, उसी अपराध पर महर्षि ने नहुष को सर्प बना दिया था।

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