अलंकार महोदधि का आलोचनात्मक अध्ययन | Alankar Mahodadhi Ka Alochanatmak Adhyayan

अलंकार महोदधि का आलोचनात्मक अध्ययन | Alankar Mahodadhi Ka Alochanatmak Adhyayan

अलंकार महोदधि का आलोचनात्मक अध्ययन | Alankar Mahodadhi Ka Alochanatmak Adhyayan के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : अलंकार महोदधि का आलोचनात्मक अध्ययन है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Kamini Purvar | Kamini Purvar की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 28.74 MB है | पुस्तक में कुल 281 पृष्ठ हैं |नीचे अलंकार महोदधि का आलोचनात्मक अध्ययन का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | अलंकार महोदधि का आलोचनात्मक अध्ययन पुस्तक की श्रेणियां हैं : literature

Name of the Book is : Alankar Mahodadhi Ka Alochanatmak Adhyayan | This Book is written by Kamini Purvar | To Read and Download More Books written by Kamini Purvar in Hindi, Please Click : | The size of this book is 28.74 MB | This Book has 281 Pages | The Download link of the book "Alankar Mahodadhi Ka Alochanatmak Adhyayan" is given above, you can downlaod Alankar Mahodadhi Ka Alochanatmak Adhyayan from the above link for free | Alankar Mahodadhi Ka Alochanatmak Adhyayan is posted under following categories literature |


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पुस्तक का साइज : 28.74 MB
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अलकार शब्द का आधुनिक अर्थ अनुप्रास, उपमा आदि अलंकारो के लिये ही सीमित हुआ है, किन्तु प्राचीन काल में इसकी व्याप्ति कही अधिक थी। रस, रीति, गुण, वक्रोक्ति आदि सभी का अन्तर्भाव अलकार शब्द के अन्तर्गत होता था। प्राचीन परम्परा का निर्वहन करने वाले विद्वान् आज भी साहित्य-शास्त्र ग्रन्थो को अलकार ग्रन्थ तथा उसके अध्येता को अम्लकारिक कहते है।इस विधा के लिये अनेक नाम हुए-काव्यकल्प विधि, कल्पविधि, अलकारशास्त्र, साहित्य विधा तथा काव्यशास्त्र । प्रथम दो नाम अप्रचलित है।

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