दर्शन और चिंतन | Darshan Aur Chintan

दर्शन और चिंतन | Darshan Aur Chintan

दर्शन और चिंतन | Darshan Aur Chintan के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : दर्शन और चिंतन है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Pandit Sukhlaal Ji | Pandit Sukhlaal Ji की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 31.07 MB है | पुस्तक में कुल 958 पृष्ठ हैं |नीचे दर्शन और चिंतन का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | दर्शन और चिंतन पुस्तक की श्रेणियां हैं : history, Knowledge

Name of the Book is : Darshan Aur Chintan | This Book is written by Pandit Sukhlaal Ji | To Read and Download More Books written by Pandit Sukhlaal Ji in Hindi, Please Click : | The size of this book is 31.07 MB | This Book has 958 Pages | The Download link of the book "Darshan Aur Chintan" is given above, you can downlaod Darshan Aur Chintan from the above link for free | Darshan Aur Chintan is posted under following categories history, Knowledge |


पुस्तक के लेखक :
पुस्तक की श्रेणी : ,
पुस्तक का साइज : 31.07 MB
कुल पृष्ठ : 958

Search On Amazon यदि इस पेज में कोई त्रुटी हो तो कृपया नीचे कमेन्ट में सूचित करें |
पुस्तक का एक अंश नीचे दिया गया है : यह अंश मशीनी टाइपिंग है, इसमें त्रुटियाँ संभव हैं, इसे पुस्तक का हिस्सा न माना जाये |

पंडितजीने दर्शनके क्षेत्रमें भारतीय दर्शनके प्रमाण-प्रमेयके विषयमें जो लिखा है उसका संग्रह' दार्शनिक मीमांसा' नामक विभागमें किया गया है। उससे उनका बहुश्रुतत्व तो प्रकट होता ही है, किन्तु साथ ही दार्शनिकोंमें अपने अपने अभिमत दर्शनके प्रति जो कदाग्रह होता है उसके स्थान पंडितजीमें समन्बय और माध्यस्थ्य देखा जाता है। यह समन्वय और माध्यस्थ्य केवल जैनदर्शनके अन्याससे ही आया हो, ऐसी बात नहीं, किन्तु गांधीजीके संसर्गसे, उनके जीवनदर्शनके जीवित अनेकान्तके जो पाठ पंडितजीने पढे हैं, उसका भी यह फल है।

You might also like

Leave A Reply

Your email address will not be published.