लोक-कला निबंधावली भाग ३ | Lok-Kala Nibandhavali Vol 3

लोक-कला निबंधावली भाग ३ | Lok-Kala Nibandhavali Vol 3

लोक-कला निबंधावली भाग ३ | Lok-Kala Nibandhavali Vol 3 के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : लोक-कला निबंधावली भाग ३ है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Dr. Purushottamlal Menaria | Dr. Purushottamlal Menaria की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 10.19 MB है | पुस्तक में कुल 125 पृष्ठ हैं |नीचे लोक-कला निबंधावली भाग ३ का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | लोक-कला निबंधावली भाग ३ पुस्तक की श्रेणियां हैं : literature

Name of the Book is : Lok-Kala Nibandhavali Vol 3 | This Book is written by Dr. Purushottamlal Menaria | To Read and Download More Books written by Dr. Purushottamlal Menaria in Hindi, Please Click : | The size of this book is 10.19 MB | This Book has 125 Pages | The Download link of the book "Lok-Kala Nibandhavali Vol 3" is given above, you can downlaod Lok-Kala Nibandhavali Vol 3 from the above link for free | Lok-Kala Nibandhavali Vol 3 is posted under following categories literature |


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पुस्तक का साइज : 10.19 MB
कुल पृष्ठ : 125

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भारतीय शास्त्रों के अनुसार वर्तमान नाटकों की उत्पत्ति कठपुतली से हुई है | भारत के यह सबसे प्राचीन नृत्य-शैली है | एक समय यह राजपरिवार और जनसाधारण दोनों में ही लोकप्रिय थी | आज से सौ वर्ष पूर्व कठपुतली नचाने वालों के पास कोई घर नहीं था और आजीविकार्थ ये घुमक्कड़ बिताते

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