पंचभूत | Panchbhoot

पंचभूत | Panchbhoot

पंचभूत | Panchbhoot के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : पंचभूत है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Ravindranath Tagore | Ravindranath Tagore की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 4.65 MB है | पुस्तक में कुल 192 पृष्ठ हैं |नीचे पंचभूत का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | पंचभूत पुस्तक की श्रेणियां हैं : Knowledge

Name of the Book is : Panchbhoot | This Book is written by Ravindranath Tagore | To Read and Download More Books written by Ravindranath Tagore in Hindi, Please Click : | The size of this book is 4.65 MB | This Book has 192 Pages | The Download link of the book "Panchbhoot" is given above, you can downlaod Panchbhoot from the above link for free | Panchbhoot is posted under following categories Knowledge |


पुस्तक के लेखक :
पुस्तक की श्रेणी :
पुस्तक का साइज : 4.65 MB
कुल पृष्ठ : 192

Search On Amazon यदि इस पेज में कोई त्रुटी हो तो कृपया नीचे कमेन्ट में सूचित करें |
पुस्तक का एक अंश नीचे दिया गया है : यह अंश मशीनी टाइपिंग है, इसमें त्रुटियाँ संभव हैं, इसे पुस्तक का हिस्सा न माना जाये |

श्रीयुक्त व्योम थोड़ी देरतक आंखें बन्दकर बोले-यदि सच बात पूछो तो जो अनावश्यक है, वही मनुष्यके लिये सयसे अधिक आवश्यक है। जिससे कुछ काम निकले, मतलय गैठे, पेट भरे, मनुष्य सदा ही उससे घृणा करता है। इसी लिये भारतीय ऋपियोंने भूख-प्यास सदी गरमीको एक बारही उड़ाकर मनुष्यत्वकी स्वाधीनताका प्रचार किया है। किसी चादरी चल्नुका नित्तान्त प्रयोजनीय होना जीवात्माके लिये अपमानजनक है। यदि इस अत्यावश्यकको ही मानव-सभ्यताके राजलि हासनपर बैठा दिया जाय और उसके ऊपर यदि कोई दूसरा सम्राट न माना जाय तो उस सभ्यताको हम सर्वश्रेष्ठ सभ्यता नहीं कहेंगे ।

You might also like

Leave A Reply

Your email address will not be published.