सूर-साहित्य की भूमिका | Soor Sahitya Ki Bhumika

सूर-साहित्य की भूमिका | Soor Sahitya Ki Bhumika

सूर-साहित्य की भूमिका | Soor Sahitya Ki Bhumika के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : सूर-साहित्य की भूमिका है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Dr. Ramratan Bhatnagar | Dr. Ramratan Bhatnagar की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 30.6 MB है | पुस्तक में कुल 302 पृष्ठ हैं |नीचे सूर-साहित्य की भूमिका का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | सूर-साहित्य की भूमिका पुस्तक की श्रेणियां हैं : literature

Name of the Book is : Soor Sahitya Ki Bhumika | This Book is written by Dr. Ramratan Bhatnagar | To Read and Download More Books written by Dr. Ramratan Bhatnagar in Hindi, Please Click : | The size of this book is 30.6 MB | This Book has 302 Pages | The Download link of the book "Soor Sahitya Ki Bhumika" is given above, you can downlaod Soor Sahitya Ki Bhumika from the above link for free | Soor Sahitya Ki Bhumika is posted under following categories literature |


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पुस्तक का साइज : 30.6 MB
कुल पृष्ठ : 302

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यह सुनकर कि वहाँ का करोड़ी आपके साथ अच्छा बर्ताव नहीं करता इज़रत को भी बुरा लगा है और इस विषय में उसके नाम कोषमय मन भी जा चुका है और इस तुच्छ शिष्य अबुलफ़ज़ल को भी अशा हुई है कि आपको दो चार अक्षर लिखे, वह करोड़ी यदि आपकी शिक्षा नहीं मानता हो तो हम उसका काम उतार लें और जिसको श्राप उचित समझे जो दीन दुखी और सम्पूर्ण प्रजा की पूरी संभाल कर सके उसका नाम लिख भेजें तो अर्ज करके नियत करा दें। हज़रत बादशाह आपको जुदा नहीं समझते, इसलिये उस जगह के काम की व्यवस्था आपकी इच्छा पर छोड़ी हुई है।

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