तन्त्रवाधों में काफी एवं भैरव थाट के रगों में प्रयुक्त बंदिशों का विश्लेषणात्मक अध्ययन | Tantra Bado Me Kafi Awam Bhairaw That Ke Rago Me Prayukt bandisho Ka Vishleshanatmak Adhyayan

तन्त्रवाधों में काफी एवं भैरव थाट के रगों में प्रयुक्त बंदिशों का विश्लेषणात्मक अध्ययन | Tantra Bado Me Kafi Awam Bhairaw That Ke Rago Me Prayukt bandisho Ka Vishleshanatmak Adhyayan

तन्त्रवाधों में काफी एवं भैरव थाट के रगों में प्रयुक्त बंदिशों का विश्लेषणात्मक अध्ययन | Tantra Bado Me Kafi Awam Bhairaw That Ke Rago Me Prayukt bandisho Ka Vishleshanatmak Adhyayan के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : तन्त्रवाधों में काफी एवं भैरव थाट के रगों में प्रयुक्त बंदिशों का विश्लेषणात्मक अध्ययन है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Nisha Pathak | Nisha Pathak की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 31.4 MB है | पुस्तक में कुल 339 पृष्ठ हैं |नीचे तन्त्रवाधों में काफी एवं भैरव थाट के रगों में प्रयुक्त बंदिशों का विश्लेषणात्मक अध्ययन का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | तन्त्रवाधों में काफी एवं भैरव थाट के रगों में प्रयुक्त बंदिशों का विश्लेषणात्मक अध्ययन पुस्तक की श्रेणियां हैं : dharm

Name of the Book is : Tantra Bado Me Kafi Awam Bhairaw That Ke Rago Me Prayukt bandisho Ka Vishleshanatmak Adhyayan | This Book is written by Nisha Pathak | To Read and Download More Books written by Nisha Pathak in Hindi, Please Click : | The size of this book is 31.4 MB | This Book has 339 Pages | The Download link of the book "Tantra Bado Me Kafi Awam Bhairaw That Ke Rago Me Prayukt bandisho Ka Vishleshanatmak Adhyayan " is given above, you can downlaod Tantra Bado Me Kafi Awam Bhairaw That Ke Rago Me Prayukt bandisho Ka Vishleshanatmak Adhyayan from the above link for free | Tantra Bado Me Kafi Awam Bhairaw That Ke Rago Me Prayukt bandisho Ka Vishleshanatmak Adhyayan is posted under following categories dharm |


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पुस्तक का साइज : 31.4 MB
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संगीत सभ्यता और संस्कृति को अभिव्यक्त करने का एक सशक्त साधन है। गीतं वाद्यं तथा नृत्यं त्रयं संगीतमुच्यते” संगीत की यही सर्वमान्य परिभाषा है जिसमें उसकी तीनों विधाओं का अपना-अपना महत्व है। यद्यपि यह संगीत गायन से ही प्रारंभ हुआ था, कालान्तर में गायन विधा को समृद्ध करने के लिए विविध प्रकार के वाद्यों का निर्माण हुआ तथा इन्हें उपयोग में लाया जाने लगा। तत्पश्चात् भारतीय सभ्यता के आधार पर विधिवत् चिन्तन मनन पद्धति से मनीषियों द्वारा इन वाद्यों को चार वर्गों में वर्गीकृत किया गया तथा यह पाया गया कि इनमें तंत्रवाद्य बहुत ही समृद्ध है।

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