आयुर्वेदीय विश्वकोश | Aayurvediya Vishv Kosh

आयुर्वेदीय विश्वकोश | Aayurvediya Vishv Kosh

आयुर्वेदीय विश्वकोश | Aayurvediya Vishv Kosh के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : आयुर्वेदीय विश्वकोश है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Daljeet Singh | Daljeet Singh की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 36.95 MB है | पुस्तक में कुल 748 पृष्ठ हैं |नीचे आयुर्वेदीय विश्वकोश का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | आयुर्वेदीय विश्वकोश पुस्तक की श्रेणियां हैं : ayurveda, health

Name of the Book is : Aayurvediya Vishv Kosh | This Book is written by Daljeet Singh | To Read and Download More Books written by Daljeet Singh in Hindi, Please Click : | The size of this book is 36.95 MB | This Book has 748 Pages | The Download link of the book "Aayurvediya Vishv Kosh" is given above, you can downlaod Aayurvediya Vishv Kosh from the above link for free | Aayurvediya Vishv Kosh is posted under following categories ayurveda, health |


पुस्तक के लेखक :
पुस्तक की श्रेणी : ,
पुस्तक का साइज : 36.95 MB
कुल पृष्ठ : 748

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यह पुस्तक क्या है, आयुर्वदीय, यूनानी और डॉक्टरी के सैकड़ों पुस्तकों का मक्खन है । विशपता इसमें यह है कि, इसमें प्रायः सभी विपय स्वानुभूत हैं । इसमें कोई विषय ऐसा नहीं, जिसपर पूर्ण विचार न कर लिया गया हो और जिसका परीक्षण एवं प्रयोग द्वारा प्रत्यक्ष ज्ञान न प्राप्त कर लिया गया है। कहाँ तक कहें इसमें अपने-पराये लगभग बीस वर्ष के अनुभव निष्कपट भाव से दिल खोलकर प्रकट कर दिये गये हैं। इसके पढ़ने से अनेक व्यक्ति प्रसिद्ध सर्प-विप-चिकित्सक बन गए हैं । इसके द्वारा चिकित्सा करने पर १०० में १० रागी शर्निया चंगा होते हैं । ऐसा प्रयत्न किया गया है कि, इसमें सर्प-विपचिकित्सा विपयक कोई भी ज्ञातव्य विषय छूटने न पाए । इसमें सर्प-भेद,सर्प-विप एवं उसके गुण-धर्म. सर्प-दष्ट्र के लक्षण, मृत-जीवित परीक्षा, मर्प-दष्ट की आयुर्वेदीय, यूनानी, डाक्टरी और स्वानुभून प्रारम्भिक सामान्य विशेष चिकित्सादि अनेक विषयों का विस्तृन स्पष्टोल्लेख किया गया हैं । अन्त के दो प्रकरणों में बिच्छू एवं ततैया के देश-लक्षण एवं चिकित्सा अदि | पर यथेष्ट प्रकाश डाला गया है। अन्त में इसमें आये हुये कठिन शब्दों के स्पष्टीकरण के लिये एक लघु-कोप द्वारा इस पुस्तक को समाप्त किया गया है।

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