भारत स्वाभिमान की आदर्श ग्राम निर्माण योजना का संक्षिप्त प्रारूप | Bharat Swabhimaan Ki Aadarsh Gram Nirman Yojna Ka Sankshipt Praroop

भारत स्वाभिमान की आदर्श ग्राम निर्माण योजना का संक्षिप्त प्रारूप | Bharat Swabhimaan Ki Aadarsh Gram Nirman Yojna Ka Sankshipt Praroop

भारत स्वाभिमान की आदर्श ग्राम निर्माण योजना का संक्षिप्त प्रारूप | Bharat Swabhimaan Ki Aadarsh Gram Nirman Yojna Ka Sankshipt Praroop के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : भारत स्वाभिमान की आदर्श ग्राम निर्माण योजना का संक्षिप्त प्रारूप है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Rajiv Dixit | Rajiv Dixit की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 01.4 MB है | पुस्तक में कुल 02 पृष्ठ हैं |नीचे भारत स्वाभिमान की आदर्श ग्राम निर्माण योजना का संक्षिप्त प्रारूप का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | भारत स्वाभिमान की आदर्श ग्राम निर्माण योजना का संक्षिप्त प्रारूप पुस्तक की श्रेणियां हैं : inspirational, Knowledge

Name of the Book is : Bharat Swabhimaan Ki Aadarsh Gram Nirman Yojna Ka Sankshipt Praroop | This Book is written by Rajiv Dixit | To Read and Download More Books written by Rajiv Dixit in Hindi, Please Click : | The size of this book is 01.4 MB | This Book has 02 Pages | The Download link of the book "Bharat Swabhimaan Ki Aadarsh Gram Nirman Yojna Ka Sankshipt Praroop" is given above, you can downlaod Bharat Swabhimaan Ki Aadarsh Gram Nirman Yojna Ka Sankshipt Praroop from the above link for free | Bharat Swabhimaan Ki Aadarsh Gram Nirman Yojna Ka Sankshipt Praroop is posted under following categories inspirational, Knowledge |


पुस्तक के लेखक :
पुस्तक की श्रेणी : ,
पुस्तक का साइज : 01.4 MB
कुल पृष्ठ : 02

Search On Amazon यदि इस पेज में कोई त्रुटी हो तो कृपया नीचे कमेन्ट में सूचित करें |
पुस्तक का एक अंश नीचे दिया गया है : यह अंश मशीनी टाइपिंग है, इसमें त्रुटियाँ संभव हैं, इसे पुस्तक का हिस्सा न माना जाये |

स्वदेशी से स्वावलम्बी गांव : विदेशी वस्तु, विचार, वस्त्र, विदेशी भाषा, भेषज, विदेशी दवा, भोजन, भजन, विदेशी खाद, कीटनाशक व तेलादि से देश के प्रति वर्ष लगभग 15 से 20 लाख करोड़ रुपये के धन की बर्बादी हो रही है। हमें स्वदेशी के रास्ते पर चल कर देश के धन, संसाधन, बचपन, यौवन व संस्कारों को बचाना है और स्वदेशी वस्तु, विचार, वस्त्र, स्वदेशी भाषा, स्वेदशी दवा व चिकित्सा, स्वदेशी गोबर आदि का खाद व पशुओं के गोमूत्रादि से बने कीटनाशकादि का प्रयोग करके तथा तेल आदि के क्षेत्र में भी देश को आत्मनिर्भर बनाकर अपनी आवश्यकताओं की तो पूर्ति हमें करनी ही है|

You might also like

Leave A Reply

Your email address will not be published.