बोलते क्षण | Bolte Kshan

बोलते क्षण | Bolte Kshan

बोलते क्षण | Bolte Kshan के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : बोलते क्षण है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Jagdish Chandra Mathur | Jagdish Chandra Mathur की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 3 MB है | पुस्तक में कुल 194 पृष्ठ हैं |नीचे बोलते क्षण का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | बोलते क्षण पुस्तक की श्रेणियां हैं : Stories, Novels & Plays

Name of the Book is : Bolte Kshan | This Book is written by Jagdish Chandra Mathur | To Read and Download More Books written by Jagdish Chandra Mathur in Hindi, Please Click : | The size of this book is 3 MB | This Book has 194 Pages | The Download link of the book "Bolte Kshan" is given above, you can downlaod Bolte Kshan from the above link for free | Bolte Kshan is posted under following categories Stories, Novels & Plays |


पुस्तक के लेखक :
पुस्तक की श्रेणी :
पुस्तक का साइज : 3 MB
कुल पृष्ठ : 194

Search On Amazon यदि इस पेज में कोई त्रुटी हो तो कृपया नीचे कमेन्ट में सूचित करें |
पुस्तक का एक अंश नीचे दिया गया है : यह अंश मशीनी टाइपिंग है, इसमें त्रुटियाँ संभव हैं, इसे पुस्तक का हिस्सा न माना जाये |

शब्द और अर्य के सम्मिश्रण से कहीं अधिक प्रभावोत्पादक और कभी-कभी घातक है शब्द और आचरण की अभिन्नता ! बात यह है कि यदि शब्द और आचरण एक हो जाएं तब या तो आदमी संत हो जाता है या राक्षस ! सुनते आए है, जो कहते हो सो करो'। पर अनुभव बताता है कि कथनी और करनी का एकीकरण सर्वदा ही मानव के लिए कल्याणकर नहीं होता। चतुर्वर्णी-द्विवर्णी शब्दों ही को लें। इन शब्दों और इनके अनुसार अाचरण का मिलन वस्तुतः काम और क्रोध का भयावह संगम हो जाती है, ऐसा संगम जिसकी विकराल भंवरों और आतककारी, सर्व ग्रासी उत्ताल तरंगों में शब्द जड़ हो जाते है, सौंदर्य सहम जाता है और दया, करुणा, मानवता-सभी की फटीफटी प्राणों, थरथर कांपते अगों और बंधी और थमी हुई बाजी के आगे होता है अमानुपिक कृत्यों का बीभत्स अट्टहास ।"

You might also like

Leave A Reply

Your email address will not be published.