गाँधी जी के साथ सात दिन | Gandhi Jee Ke Sath Sat Din

गाँधी जी के साथ सात दिन | Gandhi Jee Ke Sath Sat Din

गाँधी जी के साथ सात दिन | Gandhi Jee Ke Sath Sat Din के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : गाँधी जी के साथ सात दिन है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Kulabhushan, Sudarshan | Kulabhushan, Sudarshan की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : , | इस पुस्तक का कुल साइज 51.13 MB है | पुस्तक में कुल 135 पृष्ठ हैं |नीचे गाँधी जी के साथ सात दिन का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | गाँधी जी के साथ सात दिन पुस्तक की श्रेणियां हैं : history

Name of the Book is : Gandhi Jee Ke Sath Sat Din | This Book is written by Kulabhushan, Sudarshan | To Read and Download More Books written by Kulabhushan, Sudarshan in Hindi, Please Click : , | The size of this book is 51.13 MB | This Book has 135 Pages | The Download link of the book "Gandhi Jee Ke Sath Sat Din" is given above, you can downlaod Gandhi Jee Ke Sath Sat Din from the above link for free | Gandhi Jee Ke Sath Sat Din is posted under following categories history |


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पुस्तक का साइज : 51.13 MB
कुल पृष्ठ : 135

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इस छोटी सी किताब के छपने में मेरा दोष नहीं। मैंने गांधीजी के साथ सात दिन गुजारे और उनकी डायरी लिख ली थी। मुझे डर था, कहीं यह नोट गुम न हो जाएं । इस लिए अमरीको वापस आते ही मैंने उन्हें सिलसिलेवार लिख लिया। मेरे कुछ मित्रों ने यह नोट देखे, तो बोले-इन्हें छपवा डालो। मैंने कहा यह मेरी भारत-यात्रा का अधूरा हाल होगा। मैं बहुतसे और लोगों से भी मिला हूँ और मैंने उनसे भी काफी बातें की हैं जो कम जरूरी नहीं। गांधीजी पर लिखी हुई किताब हिदुस्तान के बारे में लिखी हुई किताब नहीं कही जा सकती। यह सब ठीक है, उन्होंने कहा। * मगर यह बात तुम भूमिका में कह सकते हो।" और मैं कह रहा हूँ।

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