गांधीवाद – समाजवाद | Gandhivad – Samajwad

गांधीवाद – समाजवाद/ Gandhivad – Samajwad

गांधीवाद – समाजवाद/ Gandhivad – Samajwad के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : गांधीवाद – समाजवाद है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Acharya Kaka Kalelkar | Acharya Kaka Kalelkar की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 4.48 MB है | पुस्तक में कुल 226 पृष्ठ हैं |नीचे गांधीवाद – समाजवाद का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | गांधीवाद – समाजवाद पुस्तक की श्रेणियां हैं : society

Name of the Book is : Gandhivad – Samajwad | This Book is written by Acharya Kaka Kalelkar | To Read and Download More Books written by Acharya Kaka Kalelkar in Hindi, Please Click : | The size of this book is 4.48 MB | This Book has 226 Pages | The Download link of the book "Gandhivad – Samajwad" is given above, you can downlaod Gandhivad – Samajwad from the above link for free | Gandhivad – Samajwad is posted under following categories society |


पुस्तक के लेखक :
पुस्तक की श्रेणी :
पुस्तक का साइज : 4.48 MB
कुल पृष्ठ : 226

Search On Amazon यदि इस पेज में कोई त्रुटी हो तो कृपया नीचे कमेन्ट में सूचित करें |
पुस्तक का एक अंश नीचे दिया गया है : यह अंश मशीनी टाइपिंग है, इसमें त्रुटियाँ संभव हैं, इसे पुस्तक का हिस्सा न माना जाये |

कई मित्रो ने बार-बार मुझसे आग्रह किया है कि मैं इस विषय की विस्तारपूर्वक चर्चा करू। किंतु स्वयं मुझे इस चर्चा को चलाने में बहुत दिलचस्पी नही थी, यही नहीं, बल्कि बहुधा मैने इसे शान्त करने का प्रयत्न किया है । कारण, शास्त्रार्थ की चर्चा में हम लोगो की इतनी ज्यादा दिलचस्पी बढ गई है कि एक तरह इसे हम अपने पीछे लगा हुआ एक व्यसन या रोग भी कह सकते है। वाद-विवाद के नशे में प्राय हमें इसका खयाल ही नहीं रहता, कि इन विवादो का व्यावहारिक परिणाम क्या हो सकता है। और चर्चा के ये विषय ही ऐसे है, कि कयामत के दिन तक इनकी चर्चा करते रहे, तब भी शायद इनके विषय में सबको एक मत नहीं होगा।

You might also like

Leave A Reply

Your email address will not be published.