हिंदी प्रेमाख्यानक काव्य | Hindi Premakhyanak Kavya

हिंदी प्रेमाख्यानक काव्य | Hindi Premakhyanak Kavya

हिंदी प्रेमाख्यानक काव्य | Hindi Premakhyanak Kavya के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : हिंदी प्रेमाख्यानक काव्य है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Dr. Kamal Kulshrestha | Dr. Kamal Kulshrestha की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 102.5 MB है | पुस्तक में कुल 470 पृष्ठ हैं |नीचे हिंदी प्रेमाख्यानक काव्य का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | हिंदी प्रेमाख्यानक काव्य पुस्तक की श्रेणियां हैं : Knowledge, Stories, Novels & Plays

Name of the Book is : Hindi Premakhyanak Kavya | This Book is written by Dr. Kamal Kulshrestha | To Read and Download More Books written by Dr. Kamal Kulshrestha in Hindi, Please Click : | The size of this book is 102.5 MB | This Book has 470 Pages | The Download link of the book "Hindi Premakhyanak Kavya " is given above, you can downlaod Hindi Premakhyanak Kavya from the above link for free | Hindi Premakhyanak Kavya is posted under following categories Knowledge, Stories, Novels & Plays |


पुस्तक के लेखक :
पुस्तक की श्रेणी : ,
पुस्तक का साइज : 102.5 MB
कुल पृष्ठ : 470

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आकाश में अपनी राह से बहुत दूर हटे हुए सितारे के समान जब मेरा जीवन यह नहीं समझ पा रहा था कि वह क्या करे, कहाँ जय, उन दिनों यह पुस्तक लिखी गई मन कुछ उलझा चुलझा-सा और बिखरा बिखरा-सा था। मैंने अपने को असफलताओं और निराशाओं की मूर्ति मान लिया था। एम० ए० के परीक्षाफल पर प्रयाग विश्वविद्यालय ने मुझे जो स्वर्ण-पदक प्रदान किया था वह अपनी सारी भी मेरे लिये खो चुका था । मन में फिर भी कुछ कर गुजरने की चाह थी और वही इस पुस्तक के लिखने में प्रेरणा देती रहे |

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