कला की कलम | Kala Ki Kalam

कला की कलम | Kala Ki Kalam

कला की कलम | Kala Ki Kalam के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : कला की कलम है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Raghuvir Sharan | Raghuvir Sharan की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 6.7 MB है | पुस्तक में कुल 176 पृष्ठ हैं |नीचे कला की कलम का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | कला की कलम पुस्तक की श्रेणियां हैं : literature

Name of the Book is : Kala Ki Kalam | This Book is written by Raghuvir Sharan | To Read and Download More Books written by Raghuvir Sharan in Hindi, Please Click : | The size of this book is 6.7 MB | This Book has 176 Pages | The Download link of the book "Kala Ki Kalam " is given above, you can downlaod Kala Ki Kalam from the above link for free | Kala Ki Kalam is posted under following categories literature |


पुस्तक के लेखक :
पुस्तक की श्रेणी :
पुस्तक का साइज : 6.7 MB
कुल पृष्ठ : 176

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कला की कलम वही है जो पूर्ण का अराधनामृत आकर्षण के अम्लान अंगूरो मे भर मादक चेतना से भौतिक एवं दार्शनिक चित्रो मे झूम स्वर गति और लालित्य ला दे जो रसादिमका को सत्यम् शिवम् सुन्दरम् के सौन्दर्यमें आत्मसात् कर तैरती हुई दिखाई दे । जो अतीत की विस्मृतियो पर स्मृति की चमकती हुई चॉदनी बिछाकर गाये । जो अनुभूति की कला तथा शास्त्री की बुद्धि से अभिव्यक्ति कर सके जो कलाकार के हृदय की तस्वीर को शेप संसार की तस्वीर बना सरसो मी फुले जो रसो की निर्भरणी सी झरे जो प्रकृति की गोद में गंगा बनकर तैरै जो भाषा के भव भूषित फूलो में विहार करे और ऑसुशो की बरसात मे लेखनी की स्याही को करुण कर कण कण झनझनाती हुई |

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