कस्तूरी गंध | Kasturi Gandh

कस्तूरी गंध : प्रीतिश्री | Kasturi Gandh : Preeti Shri

कस्तूरी गंध : प्रीतिश्री | Kasturi Gandh : Preeti Shri के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : कस्तूरी गंध है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Preetishree | Preetishree की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 2.3 MB है | पुस्तक में कुल 96 पृष्ठ हैं |नीचे कस्तूरी गंध का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | कस्तूरी गंध पुस्तक की श्रेणियां हैं : Poetry

Name of the Book is : Kasturi Gandh | This Book is written by Preetishree | To Read and Download More Books written by Preetishree in Hindi, Please Click : | The size of this book is 2.3 MB | This Book has 96 Pages | The Download link of the book "Kasturi Gandh" is given above, you can downlaod Kasturi Gandh from the above link for free | Kasturi Gandh is posted under following categories Poetry |


पुस्तक के लेखक :
पुस्तक की श्रेणी :
पुस्तक का साइज : 2.3 MB
कुल पृष्ठ : 96

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मन की बात
काव्य-३धि को 'कस्तुरी ग॥' समर्पित करते हुए एक अनकही पर भीतर तक महसुसो प्रसन्नता हो रही है।
कविता कोई जागकर नहीं लिखता परन्तु जहां तक मेरी सोच पहुंचती झै कविता स्वयं मां सरस्वती की वाणी हैं। इसलिए जब तक भीतर से 'सुरत' ५७ शिवाने का प्रयास नहीं करती, कविता का जन्म नहीं होता।
ऐसा ही कुछ 'कत्तूरी गंध' में भी समाहित हैं। मन के दीप को समयमामय पर B देने वाली अनजान नहरें कही गीतों में इन गई तो कहीं आकाश पर उगने वाले चार, तारों, गुरज और क्षितिज को बात-पाश में समेट लेने की लालसा ने मप्ले कति दी। कभी बरसात का भीगा मौसम, हुवाओं का छन, आस्थाओं का तीखापन और कभी भीतर-ही-भीतर दृटता हुआ कवि गन, समाज की घोर विषमताभों को देखकर कवि बन बैठा।
यूं मैं तय कवित्री होने का दावा भी नहीं करती। 'कस्तूरी मध' तो मन को हरी पर दस्तक देते हुए अनेक प्रश्न और मासूमियत भरी भावनाएं हैं जिसे नानी बादलों, फगुगठी पतमर, मधुमास और जीवन के बहुआयामी समास के सम-विषम ागों में हमने अपने एहसास है।
| कहानी संग्रह "बीच की औरत' आम औरत की जिन्दगी को जीवन देने का प्रयास था, जिससे मुझे अनेक स्थापित कहानीकारों एवं आम पाठकों से बहुत सहयोग और स्नेह मिला है।
यह माना कि 'कस्तूरी गंध' में कुछ कमियां भी हो सकती है, परन्तु मनुष्य अपूर्ण है, अतः 'कस्तुरी गंध' भी आपने अपना पूरा स्नेह और अपनापन चाहती है।

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