महऋषि सुकरात | Mahrishi Sukrat

महऋषि सुकरात | Mahrishi Sukrat

महऋषि सुकरात | Mahrishi Sukrat के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : महऋषि सुकरात है | इस पुस्तक के लेखक हैं : veneeprasaad | veneeprasaad की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 9.26 MB है | पुस्तक में कुल 336 पृष्ठ हैं |नीचे महऋषि सुकरात का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | महऋषि सुकरात पुस्तक की श्रेणियां हैं : Biography, Knowledge

Name of the Book is : Mahrishi Sukrat | This Book is written by veneeprasaad | To Read and Download More Books written by veneeprasaad in Hindi, Please Click : | The size of this book is 9.26 MB | This Book has 336 Pages | The Download link of the book "Mahrishi Sukrat " is given above, you can downlaod Mahrishi Sukrat from the above link for free | Mahrishi Sukrat is posted under following categories Biography, Knowledge |


पुस्तक के लेखक :
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पुस्तक का साइज : 9.26 MB
कुल पृष्ठ : 336

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सत्य का बल बड़ा प्रवल है। इसका स्वाद जिसने चखा है वह इसके सामने संसार की परवाह नहीं करता। निंदा स्तुति, मान अपमान, हानि लाभ, यहाँ तक कि मृत्यु का भी वह तुच्छ समझता है। लोकनिंदा उसे डरा नहीं सकती, दरिद्रता उसे उदास नहीं कर सकती, राजपुरुषों की लाल ऑखे उसे धमका नहीं सकती, अपमान, मृत्यु कोई भी उसे अपने सिद्धांत से एक इंच डिगा नहीं सकता। वह एक अचल चट्टान है, जिस पर सब सांसारिक कामनाए टकराटकरा कर छिन्न-भिन्न हो जाती हैं। लोहे की लाखे मुद्रों से उस चट्टान को तोड़ने की चेष्टा करनेवाले उसके वज्रभेदी शब्द के सुनकर चैक पड़ते हैं और पत्थर पर लोहे की चेद से जो चिनगारियाँ निकलती हैं|

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