मैत्रायणी – संहिता | Maitrayani Samhita

मैत्रायणी – संहिता | Maitrayani Samhita

मैत्रायणी – संहिता | Maitrayani Samhita के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : मैत्रायणी – संहिता है | इस पुस्तक के लेखक हैं : P. Sripad Damodar Satvalekar | P. Sripad Damodar Satvalekar की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 33.1 MB है | पुस्तक में कुल 576 पृष्ठ हैं |नीचे मैत्रायणी – संहिता का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | मैत्रायणी – संहिता पुस्तक की श्रेणियां हैं : dharm

Name of the Book is : Maitrayani Samhita | This Book is written by P. Sripad Damodar Satvalekar | To Read and Download More Books written by P. Sripad Damodar Satvalekar in Hindi, Please Click : | The size of this book is 33.1 MB | This Book has 576 Pages | The Download link of the book "Maitrayani Samhita " is given above, you can downlaod Maitrayani Samhita from the above link for free | Maitrayani Samhita is posted under following categories dharm |


पुस्तक के लेखक :
पुस्तक की श्रेणी :
पुस्तक का साइज : 33.1 MB
कुल पृष्ठ : 576

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अथान्यज्ञाप्युक्तं हे वाव ब्रह्मणी भिध्येये शब्दंश्चाशब्दश्चार्थ शब्देनैवशब्दमा विष्क्रियते तत्रोमिति शब्दो ने नोईसुत्क्रान्तो शब्दे निधनमेत्यर्थ हैया गतिरेतदमृतमेतत्सायुज्यत्वं निर्वृत्तत्व तथा चेत्यथ यथोर्गनाभिस्तन्तुनोर्द्वमुत्क्रान्तोऽवकाशं लभत इत्येवुवाव खल्वसाऽभिध्यातऽमित्यनेनोर्द्वमुत्क्रान्तः स्वातन्त्र्यं लभतेऽन्यथा परे शब्दवादिनः श्रवणाङ्गुष्ठयोगेनान्तहृदयाकशिशब्दमाकर्णयन्ति सतविधेयं तस्योपमा यर्था नद्यः किङ्किणी का स्यूचर्कमेकावप्कृन्धुिकावृष्टिनिर्वाते वदुतीति तं पृथग्लक्षणमितीत्य परे शब्देऽव्यक्ते ब्रह्मण्यस्तं गतास्तत्र तेऽपृथग्धर्मिणोऽपृथग्विर्वेक्या यथा सम्पन्ना मधुत्वं नानारसाऽइत्येव ह्याहे |

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