मानसरोवर (भाग 5) | Mansarovar (Part 5)

मानसरोवर (भाग 5) | Mansarovar (Part 5)

मानसरोवर (भाग 5) | Mansarovar (Part 5) के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : मानसरोवर (भाग 5) है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Munshi Premchand | Munshi Premchand की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 01.9 MB है | पुस्तक में कुल 55 पृष्ठ हैं |नीचे मानसरोवर (भाग 5) का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | मानसरोवर (भाग 5) पुस्तक की श्रेणियां हैं : Knowledge, Stories, Novels & Plays

Name of the Book is : Mansarovar (Part 5) | This Book is written by Munshi Premchand | To Read and Download More Books written by Munshi Premchand in Hindi, Please Click : | The size of this book is 01.9 MB | This Book has 55 Pages | The Download link of the book "Mansarovar (Part 5)" is given above, you can downlaod Mansarovar (Part 5) from the above link for free | Mansarovar (Part 5) is posted under following categories Knowledge, Stories, Novels & Plays |


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पुस्तक का साइज : 01.9 MB
कुल पृष्ठ : 55

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दोनों महात्मा अलग खड़े होकर अपने-अपने रचना-कौशल की डींगें मार रहे। थे । मल्ल-युद्ध शास्त्रार्थ का रूप धारण करने लगा, जो विद्वानों के लिए उचित है। इतने में किसी ने चिन्तामणिजी के घर जाकर कह दिया कि पण्डित मोटेराम और चिन्तामणिजी मै वड़ी लड़ाई हो रही है। चिन्तामणिजी तीन महिलाओं के स्वामी थे। कुलीन व्राह्मण थे, पूरे वीस विस्वे उस पर विद्वान् भी उच्चकोटि के, दूर-दूर तक यजमानी थी। ऐसे पुरुषो को सब अधिकार है। कन्या के साथ-साथ जय प्रचुर दक्षिणा भी मिलती हो, तब कैसे इनकार किया जाय । इन तीन महिलाओं का सारे महल्ले में तक छाया हुआ था।

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