पाश्चात्य राजनितिक चिन्तन का इतिहास | Pashchatya Rajnitik Chintan Ka Itihas

पाश्चात्य राजनितिक चिन्तन का इतिहास | Pashchatya Rajnitik Chintan Ka Itihas

पाश्चात्य राजनितिक चिन्तन का इतिहास | Pashchatya Rajnitik Chintan Ka Itihas के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : पाश्चात्य राजनितिक चिन्तन का इतिहास है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Dr. G. D. Tiwari | Dr. G. D. Tiwari की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 58.21 MB है | पुस्तक में कुल 684 पृष्ठ हैं |नीचे पाश्चात्य राजनितिक चिन्तन का इतिहास का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | पाश्चात्य राजनितिक चिन्तन का इतिहास पुस्तक की श्रेणियां हैं : history

Name of the Book is : Pashchatya Rajnitik Chintan Ka Itihas | This Book is written by Dr. G. D. Tiwari | To Read and Download More Books written by Dr. G. D. Tiwari in Hindi, Please Click : | The size of this book is 58.21 MB | This Book has 684 Pages | The Download link of the book "Pashchatya Rajnitik Chintan Ka Itihas " is given above, you can downlaod Pashchatya Rajnitik Chintan Ka Itihas from the above link for free | Pashchatya Rajnitik Chintan Ka Itihas is posted under following categories history |


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पुस्तक का साइज : 58.21 MB
कुल पृष्ठ : 684

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सुकरात के मृत्यु-दण्ड ने प्लेटो के चिन्तन को व्यापक रूप से प्रभावित किया था। उसके फलस्वरूप प्लेटो का हृदय लोकतन्त्र के लिए घृणा से भर गया, उसे भीड़ के शासन से अरुचि हो गई और वह ऐसी शासन-प्रणाली की कल्पना करने लगा जिसमा संचालन सर्वश्रेष्ठ व्यक्तियों के द्वारा होता हो । अपने गुरू एवं मित्र सुकरात के निधन के उपरान्त वह एथेंस छोड़कर चला गया। पारम्परिक किंवदन्तियों के अनुसार, इस काल में उसने मिस्र, साइरीन आदि देशों की यात्रा की। एक किवदन्ती के अनुसार, वह इस काल में भारत भी आया ।

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