सुख यहाँ | Sukh Yayan

सुख यहाँ | Sukh Yayan

सुख यहाँ | Sukh Yayan के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : सुख यहाँ है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Shri Sahjanand Shastrmala | Shri Sahjanand Shastrmala की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 28.9 MB है | पुस्तक में कुल 450 पृष्ठ हैं |नीचे सुख यहाँ का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | सुख यहाँ पुस्तक की श्रेणियां हैं : inspirational

Name of the Book is : Sukh Yayan | This Book is written by Shri Sahjanand Shastrmala | To Read and Download More Books written by Shri Sahjanand Shastrmala in Hindi, Please Click : | The size of this book is 28.9 MB | This Book has 450 Pages | The Download link of the book " Sukh Yayan " is given above, you can downlaod Sukh Yayan from the above link for free | Sukh Yayan is posted under following categories inspirational |


पुस्तक के लेखक :
पुस्तक की श्रेणी :
पुस्तक का साइज : 28.9 MB
कुल पृष्ठ : 450

Search On Amazon यदि इस पेज में कोई त्रुटी हो तो कृपया नीचे कमेन्ट में सूचित करें |
पुस्तक का एक अंश नीचे दिया गया है : यह अंश मशीनी टाइपिंग है, इसमें त्रुटियाँ संभव हैं, इसे पुस्तक का हिस्सा न माना जाये |

हमारी यह धारणा भ्रम मात्र है कि हमे अमुक पदार्थ सुखी करता है और अमुक दुखी करता है । सव पदार्थ अपने-अपने द्रव्य, क्षेत्र, काल, भाव से परिणमते हैं, एक पदार्थ दूसरे पदार्थ का कुछ नहीं कर सकता । इस जीव के अन्दर ही विकल्पों की चक्की चल रही है । उस चक्की में यह आत्म भगवान् पिसता जा रहा है, कोई दूसरा इसे दुखी करने वाला नहीं है। जो सयोग में सुख मानते हैं वे वियोग मे नियम से दुखी होगे । अत शरीर या अन्य पदार्थों में इष्ट-अनिष्ट कल्पना को त्यागकर, तथा उनसे मोह छोडकर ही हम सुखी हो सकते हैं।

You might also like

Leave A Reply

Your email address will not be published.