भाग्य चक्र | Bhagya Chakra

भाग्य चक्र | Bhagya Chakra

भाग्य चक्र | Bhagya Chakra के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : भाग्य चक्र है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Sudarshan | Sudarshan की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 47.63 MB है | पुस्तक में कुल 143 पृष्ठ हैं |नीचे भाग्य चक्र का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | भाग्य चक्र पुस्तक की श्रेणियां हैं : inspirational, jyotish, Knowledge

Name of the Book is : Bhagya Chakra | This Book is written by Sudarshan | To Read and Download More Books written by Sudarshan in Hindi, Please Click : | The size of this book is 47.63 MB | This Book has 143 Pages | The Download link of the book "Bhagya Chakra" is given above, you can downlaod Bhagya Chakra from the above link for free | Bhagya Chakra is posted under following categories inspirational, jyotish, Knowledge |


पुस्तक के लेखक :
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पुस्तक का साइज : 47.63 MB
कुल पृष्ठ : 143

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आज से लगभग चालीस साल पहले लॉ कालेज, लाहौर के उस समय के प्रिन्सिपल लाला कंवरसेन ने उस वक्त के हिन्दुस्तानी नाटक पर आलोचना करते हुए लिखा था 'नाटक झौर तमाशे जो आजकल दिखाए जाते हैं, उनमें से ज्यादा ऐसे हैं, जिनमें नाटक की कोई बात भी नहीं पाई जाती । कुछ-एक को छोड़कर बाक़ी सब नाटकों के कथानक कमजोर, भाषा भद्दी और गीत वे जिनमें अंग्रेजी गीतों को देशी रागों में ऐसी बुरी तरह मिलाया जाता है, कि भगवान् ही बचाए । समझदार लोग आजकल थियेटर देखना पसन्द नहीं करते । अगर कभी शौक़ उन्हें पंडाल के अन्दर ले भी जाता है, तो वे बेतुकी चीजें सुनते ही उठ खड़े होते हैं। मतलब यह कि आज-कल हिन्दुस्तानी नाटकों में सुरुचि का खून होता है ।

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