अध्यात्मिक आलोक | Adhyatmik Alok

अध्यात्मिक आलोक : श्रीमाज्जैनाचार्य हस्तिमल जी महाराज हिंदी पुस्तक | Adhyatmik Alok : Shrimajjenacharya Hastimal Ji Maharaj Hindi Book

अध्यात्मिक आलोक : श्रीमाज्जैनाचार्य हस्तिमल जी महाराज हिंदी पुस्तक | Adhyatmik Alok : Shrimajjenacharya Hastimal Ji Maharaj Hindi Book के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : अध्यात्मिक आलोक है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Hastimal Ji Maharaj | Hastimal Ji Maharaj की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 19.72 MB है | पुस्तक में कुल 609 पृष्ठ हैं |नीचे अध्यात्मिक आलोक का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | अध्यात्मिक आलोक पुस्तक की श्रेणियां हैं : dharm, inspirational, jain

Name of the Book is : Adhyatmik Alok | This Book is written by Hastimal Ji Maharaj | To Read and Download More Books written by Hastimal Ji Maharaj in Hindi, Please Click : | The size of this book is 19.72 MB | This Book has 609 Pages | The Download link of the book "Adhyatmik Alok" is given above, you can downlaod Adhyatmik Alok from the above link for free | Adhyatmik Alok is posted under following categories dharm, inspirational, jain |


पुस्तक के लेखक :
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पुस्तक का साइज : 19.72 MB
कुल पृष्ठ : 609

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इस गरनथ को पुन सशोधित समपादित एवं किचित वयवसथित साहितयिक सवरूप परदान करने में सहयोगी सरवशरी सव. शशिकानत झा गजसिहजी राठोड़ व परेमराजजी वोगावत के परति भी उनकी इस निसवारथ एवं निशुलक शरुतसेवा के लिये मडल हारदिक आभार परकट करता है । साथ ही इसके परकाशन मे गहरी रुचि लेकर अतयलप समय में इसे अतयनत सुनदर रूप में अतयाधुनिक कमपयुटर तथा आफ सेट मशीन से मुदरित करके देने मे सहयोगी सुनदर व शरेषठ मुदरगकला में परसिदध जयपुर परिनटरस के मालिक शरी सोहनलालजी जैन एवं इनके सुपुतर शरो आलोकजी जेन तथा अनय परेस के करमचारीगण को भी मडल हारदिक धनयवाद दिये बिना नहीं रह सकता 1 इस परकाशन का परथम ससकरण कभी का समापत हो गया था । पर खेद है कि ऐसे अतयनत महततवपूरण परभावशाली परकाशन के पुनरमदरग की ओर हमारा धयान अब तक नहीं गया । आयारयशरी के इस वरष के कोसाणा ( जिला जोधपुर ) गराम में हुए चातुरमास काल में वहाँ के कुछ शरदधालु शरावको ने इस ओर मडल का धयान आकरषित किया और वही के एक दानी सजजन ने इसके परकाशन में पूरण आरथिक सहयोग देने का वचन भी दिया | इसके लिये मडल उन सभी का अतयनत आभारी है । और भी जिन-जिन महानुभावो ने परतयकषअपरतयकष रूप से इस परकाशय गरनथ के परकाशन में जो-जो सहयोग दिया उनके नाम परकट करके उनके सहयोग के होने वाले अमूलय लाभ को कम नहीं करते हुए उसके लिये मडल उन सबके परति भी अपना आभार परकट करता है । देवेनदर राज मेहता चैतनय ठडढा अधयकष मनरी समयगञान परचारक मणडल जयपुर जयपुर दिनाक ९१-८९

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