ऐसे जियें | Aise Jiyen

ऐसे जियें | Aise Jiyen

ऐसे जियें | Aise Jiyen के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : ऐसे जियें है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Acharya Shri Nanesh | Acharya Shri Nanesh की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 15 MB है | पुस्तक में कुल 370 पृष्ठ हैं |नीचे ऐसे जियें का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | ऐसे जियें पुस्तक की श्रेणियां हैं : Social

Name of the Book is : Aise Jiyen | This Book is written by Acharya Shri Nanesh | To Read and Download More Books written by Acharya Shri Nanesh in Hindi, Please Click : | The size of this book is 15 MB | This Book has 370 Pages | The Download link of the book "Aise Jiyen" is given above, you can downlaod Aise Jiyen from the above link for free | Aise Jiyen is posted under following categories Social |


पुस्तक के लेखक :
पुस्तक की श्रेणी :
पुस्तक का साइज : 15 MB
कुल पृष्ठ : 370

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साधुमार्ग की इस पवित्र पावन-धारा को अक्षुण्ण बनाये रखने के लिए बडे-बडे आचार्यों ने अपना-अपना महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है । भगवान् महावीर के बाद अनेक बार आगमिक-धरातल पर क्रान्ति का प्रसग आया है। इस क्राति के द्वारा श्रमण सस्कृति को अक्षुण्ण बनाये रखने का प्रयास किया जाता रहा । ऐसो क्रान्ति की धारा में क्रियोद्धारक महान् आचार्य श्री हुक्मीचन्दजी म सा का नाम विशेष रूप से उभर कर सामने आता है । तत्कालीन युग में जहाँ शिथिलचिार व्यापक तौर पर फैलता जा रहा था, शुद्ध साधुत्व की स्थिति विरले ही परिलक्षित होती थी । बडे-बडे साधु भो मठो की तरह उपाश्रयो में अपना स्थान जमाए हुए थे। चेलो के पीछे साधुता बिखरती चली जा रही थी। ऐसे युग में आचार्य श्री हुक्मीचन्दजी म० सा० ने उपदेशो से ही नहीं अपितु अपने विशुद्ध एव उत्कृष्ट सयममय जीवन से जनमानस को प्रभावित किया था। तप के साथ क्षमा एवं उत्कृष्ट सयम के साथ उत्कृष्ट सम्यक्जान का सयोग दुर्लभ ही देखने को मिलता है। किन्तु प्राचार्य प्रवर मे ऐसे दुर्लभ संयोग सहज सुलभ थे । आपके जीवन का ही प्रभाव था कि हजारो स्त्री-पुरुष आपके चरण सान्निध्य को पाने के लिए लालायित रहने लगे

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