अक्षर कुंडली | Akshar Kundali

अक्षर कुंडली | Akshar Kundali

अक्षर कुंडली | Akshar Kundali के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : अक्षर कुंडली है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Amrita Pritam | Amrita Pritam की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 2.5 MB है | पुस्तक में कुल 154 पृष्ठ हैं |नीचे अक्षर कुंडली का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | अक्षर कुंडली पुस्तक की श्रेणियां हैं : dharm, jyotish, Knowledge

Name of the Book is : Akshar Kundali | This Book is written by Amrita Pritam | To Read and Download More Books written by Amrita Pritam in Hindi, Please Click : | The size of this book is 2.5 MB | This Book has 154 Pages | The Download link of the book "Akshar Kundali" is given above, you can downlaod Akshar Kundali from the above link for free | Akshar Kundali is posted under following categories dharm, jyotish, Knowledge |


पुस्तक के लेखक :
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पुस्तक का साइज : 2.5 MB
कुल पृष्ठ : 154

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एक काली लकीर मेरे सामने पडी किताब मे से उठकर बिजली की सुख संकीर की तरह मेरे मन-मस्तक से गुजर गयी, जिस वक्त पढ़ा कि धरती का तवाजुन (सतुलन) उस समय बिलकुल हिल जाता है, जब सूरज वो होकर एक राशि में से दूसरी में कदम रखता है। आज तक जो कुछ भी पढ़ा यो, सुनी थी, वह यह पो कि चाद-सुरज कभी वत्री नहीं होते। पर पीरो बह रहा था कि 2150 वर्ष के बाद सूरज पत्री होता है। वह ईसाफाल से 388 वर्ष पहले मेष राशि से वक्री होकर मीन राशि में आया पा और फिर 2150 वर्ष के बाद अब शुभ राशि में आया है। सन् 1985 में 388 वष जमा किये और फिर 2373 की गिनती मे से 2150 वर्ष मनफी किये (घटाये, तो सामने 223 वर्ष आपे, सूरज को कभ राशि मै प्रवेश किये हुए । और कीरो के मुताबिक सूरज जब एक राशि में से दूसरी मे दम रखता है, तो सात सौ वर्ष संधिकाल के होते हैं जो दुनिया में भूमानक और अलौकिक तब्दीलियो का कारण होते हैं।

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