अन्त: तरंग | Antah Tarang

अन्त: तरंग | Antah Tarang

अन्त: तरंग | Antah Tarang के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : अन्त: तरंग है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Ashapoorna Devi | Ashapoorna Devi की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 4MB है | पुस्तक में कुल 214 पृष्ठ हैं |नीचे अन्त: तरंग का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | अन्त: तरंग पुस्तक की श्रेणियां हैं : Stories, Novels & Plays

Name of the Book is : Antah Tarang | This Book is written by Ashapoorna Devi | To Read and Download More Books written by Ashapoorna Devi in Hindi, Please Click : | The size of this book is 4MB | This Book has 214 Pages | The Download link of the book " Antah Tarang" is given above, you can downlaod Antah Tarang from the above link for free | Antah Tarang is posted under following categories Stories, Novels & Plays |


पुस्तक के लेखक :
पुस्तक की श्रेणी :
पुस्तक का साइज : 4MB
कुल पृष्ठ : 214

Search On Amazon यदि इस पेज में कोई त्रुटी हो तो कृपया नीचे कमेन्ट में सूचित करें |
पुस्तक का एक अंश नीचे दिया गया है : यह अंश मशीनी टाइपिंग है, इसमें त्रुटियाँ संभव हैं, इसे पुस्तक का हिस्सा न माना जाये |

बुढ़ापा जाड़े के मौसम जैसा है। प्रति क्षण स्मरण करा देता है कि अब रोशनी का खजाना खत्म होने को है, अंधकार छाने ही वाला है। जाड़े की शाम को विदा लेते देस यही बात प्रभुचरण सोच रहे थे । सोच रहे थे-या जैसे पानी खत्म होते कलश कीतरह, बेहिसाब खुर्च करते-करते अचानक ही नजर पड़ गई, कलश ठनठना रहा है, जबकि अब नए सिरे से भरने का वक्त नहीं रही, इतना भी समय नहीं रह गया कि सोच समझ कर हिसाब रखते हुए कुछ बचा कर रखा जाये

You might also like

Leave A Reply

Your email address will not be published.