अर्घ्यदान | Arghyadaan

अर्घ्यदान | Arghyadaan

अर्घ्यदान | Arghyadaan के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : अर्घ्यदान है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Sarvdanand Verma | Sarvdanand Verma की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 1.1 MB है | पुस्तक में कुल 116 पृष्ठ हैं |नीचे अर्घ्यदान का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | अर्घ्यदान पुस्तक की श्रेणियां हैं : literature

Name of the Book is : Arghyadaan | This Book is written by Sarvdanand Verma | To Read and Download More Books written by Sarvdanand Verma in Hindi, Please Click : | The size of this book is 1.1 MB | This Book has 116 Pages | The Download link of the book "Arghyadaan" is given above, you can downlaod Arghyadaan from the above link for free | Arghyadaan is posted under following categories literature |


पुस्तक के लेखक :
पुस्तक की श्रेणी :
पुस्तक का साइज : 1.1 MB
कुल पृष्ठ : 116

Search On Amazon यदि इस पेज में कोई त्रुटी हो तो कृपया नीचे कमेन्ट में सूचित करें |
पुस्तक का एक अंश नीचे दिया गया है : यह अंश मशीनी टाइपिंग है, इसमें त्रुटियाँ संभव हैं, इसे पुस्तक का हिस्सा न माना जाये |

‘अर्घ्यदान' का प्रकाशन भी उनकी भावुकता का एक प्रमाण है। हम उसे कह देना चाहते है । श्री सर्वदानन्द आजकल केबल साहित्य पर ही जीवन-निर्वाह के लिए निर्भर है। वे कोई पूंजीपति नही, यह सभी जानते है। हमने अक्सर देखा है, उनके पास कभी एक पैसा तक नहीं होता और वे हाथ पर हाथ धरे बैठे रहते है। कोई पूछ बैठता है हमने भी अक्सर पूछा है तो झुंझला पडते हैपाठको को लिटरेचर चाहिए, 'कला' चाहिए, दिमाग का भोजन चाहिए जिसे मजे से कुर्सी पर पाँव फैलाकर वह उपभोग कर सके।

You might also like

Leave A Reply

Your email address will not be published.