बच्चे और तराजू | Children And Balances

बच्चे और तराजू : जोस एल्स्टगीस्ट हिंदी पुस्तक | Children And Balances : Jos Elstgeest Hindi Book

बच्चे और तराजू : जोस एल्स्टगीस्ट हिंदी पुस्तक | Children And Balances : Jos Elstgeest Hindi Book के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : बच्चे और तराजू है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Arvind Gupta | Arvind Gupta की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 0.37 MB है | पुस्तक में कुल 12 पृष्ठ हैं |नीचे बच्चे और तराजू का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | बच्चे और तराजू पुस्तक की श्रेणियां हैं : children, Knowledge

Name of the Book is : Children And Balances | This Book is written by Arvind Gupta | To Read and Download More Books written by Arvind Gupta in Hindi, Please Click : | The size of this book is 0.37 MB | This Book has 12 Pages | The Download link of the book "Children And Balances" is given above, you can downlaod Children And Balances from the above link for free | Children And Balances is posted under following categories children, Knowledge |


पुस्तक के लेखक :
पुस्तक की श्रेणी : ,
पुस्तक का साइज : 0.37 MB
कुल पृष्ठ : 12

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कया तुम तराज़ू से कुछ पूछना चाहते हो? तो पहले एक तराज़ू बनाओ। बनाने के लिए लकड़ी का छोटा टुकड़ा एक लकड़ी की पटटी एक हथौड़ी और कुछ कीलों इसतेमाल करो। इन चितरों में उनहें जोड़ने का ह तरीका दिखाया गया है। ८ यह ज़रूरी है कि खूब सारे तराज़ू हों - ी धर कम से कम दो बचचों के बीच में दि एक तराज़ू अवशय हो। हि हि वैसे बचचे तीन-तीन की टोलियों में भी काम कर सकते हैं - उनके बीच अचछी चरचा होगी। 0 हम इसे आसानी से बना सकते हैं । एक फुट-रूल जैसी लकड़ी की लंबी पटटी लो। उस पर छेदों की दो रेखाएं हों। छेदों की संखया असम हो। एक लकड़ी की पटटी में कुछ छेद करने से भी तराज़ू की अचछी डंडी बन सकती है। इस सरल उपकरण को आप कम न समझें - यहा हि दि फयपयपनन काफी संवेदनशील है और लि थे यह छेद केंदर से ज़रा हे. | एक गराम का छोटा अंश भी हु. हर तोल सकता है। भा सा ऊपर है। छोटे बचचों के साथ इसमें आपको कोई खास दिककत नहीं आएगी । बस एक बात का धयान रखें। तराज़ू उपलबध हों और उनके रब हों - कुछ लकड़ी के गुटके कंचे बीज चने के दाने वाशर और इधर-उधर की कुछ चुनिंदा चीज़ें। बचचे जिस परकार चाहें उस तरह अपनी खोजबीन करें। यह बचचों का पहला परयास है और इसी से पहला संवाद शुरू होगा तुम कौन हो? तुम कया कर रहे हो? यह बुनियादी परशन उनके लिए परयापत हैं। आप बचचों और तराज़ुओं दोनों को धयान से और बारीकी से देखें और उन दोनों से सीखें। मैडम देखें यह एक छोटी कहानी नीचे चला गया। युलिथा और डोमनिक दोनों एक छोटे से तराज़ू पर काम कर रहे हैं। युलिथा देखती है कि तराज़ू का भारी हिससा नीचे की ओर झुकता है। वह अब दूसरी आरे कुछ भार रखती है जिससे कि वो पलड़ा नीचे की ओर झुक जाता है। वो अपने इस जब मैं इस पर अवलोकन से संतुषट र से कुछ उठाती हूं देखो यह कैसा शी होकर किसी और काम 2९. तो यह झुक टेढ़ा लटका है दि में वयसत हो जाती है। रे) जाता है। 04 || अब डोमनिक देखता है ं कि थोड़ा सा भार रखने से तराज़ू कम नीचे झुकता है और ज़यादा भार रखने से वो अधिक नीचे झुकता है। इसमें उसे बड़ा आनंद आता है लि और वो अपनी खोजबीन ज़ारी रखते हुए अलग-अलग द चीज़ें रख कर देखता है। इससे एक बात सपषट होती है। | ले वो झूले के समान की 42 मी श का जैसी झूलता है परंतु फिर सब बचचे एक चीज़ पर काम करते हुए भी एक जैसी सथिों जाता है। करियाएं नहीं करते

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