बौद्धधर्म और बिहार | Bauddhdharm and Bihar

बौद्धधर्म और बिहार | Bauddhdharm and Bihar

बौद्धधर्म और बिहार | Bauddhdharm and Bihar के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : बौद्धधर्म और बिहार है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Hawaldar Tripathi | Hawaldar Tripathi की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 15.52 MB है | पुस्तक में कुल 476 पृष्ठ हैं |नीचे बौद्धधर्म और बिहार का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | बौद्धधर्म और बिहार पुस्तक की श्रेणियां हैं : dharm, Knowledge

Name of the Book is : Bauddhdharm and Bihar | This Book is written by Hawaldar Tripathi | To Read and Download More Books written by Hawaldar Tripathi in Hindi, Please Click : | The size of this book is 15.52 MB | This Book has 476 Pages | The Download link of the book "Bauddhdharm and Bihar" is given above, you can downlaod Bauddhdharm and Bihar from the above link for free | Bauddhdharm and Bihar is posted under following categories dharm, Knowledge |


पुस्तक के लेखक :
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पुस्तक का साइज : 15.52 MB
कुल पृष्ठ : 476

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इसके अतिरिक्त हम भगवान् पुद को वर-वध के सिद्धान्तों के झगडन में चोर ग-यो । के सिद्धान्तों के स्थान में सर्वत्र तक शक्ति का साहाय्य लेते देखते हैं। अतः, जिस प्रकार तर्कशास्त्र पदा, मध्य, हेतु और हष्टोत–इन चार-विषयों पर अवलम्बित है, उसी प्रकार बुद्ध ने तृष्णा:उच्छदाले चार आर्यसत्यों का सूत्र इसी तर्कशास्त्र में पाया हो, तो कोई असमग महो। पुनः हम बुद्ध के 'प्रतीत्यसमुत्पाद निद्वलि को भी निगा और आर्य-सी के साध 'वंशावगर' के रूप में जाते हैं। यह भी जान गीता है कि न्यायशास्त्र के पंचावर ने उन्हें बहुत कुछ प्रेरित किया होगा, ऐसा मेरा अनुमान है। इतना ही नहीं, न्याग शास्त्र के पारिभाषिक शब्दों का भी स्पनर हम वचनों में पाते हैं। जैसे-व्याप्ति को ‘न्वय पतिरेक के द्वारा शुद्ध किया जाता है, इसी तरह बुद्ध ने तीनमुत्पाद को 'अनुलोम-लिलोम' में हारा ही परिशोधित किया है

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