बाज़ार का ये हाल है | Bazar Ka Ye Hal Hai

बाज़ार का ये हाल है | Bazar Ka Ye Hal Hai

बाज़ार का ये हाल है | Bazar Ka Ye Hal Hai के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : बाज़ार का ये हाल है है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Shail Chaturvedi | Shail Chaturvedi की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 01.0 MB है | पुस्तक में कुल 98 पृष्ठ हैं |नीचे बाज़ार का ये हाल है का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | बाज़ार का ये हाल है पुस्तक की श्रेणियां हैं : Knowledge, Stories, Novels & Plays

Name of the Book is : Bazar Ka Ye Hal Hai | This Book is written by Shail Chaturvedi | To Read and Download More Books written by Shail Chaturvedi in Hindi, Please Click : | The size of this book is 01.0 MB | This Book has 98 Pages | The Download link of the book "Bazar Ka Ye Hal Hai" is given above, you can downlaod Bazar Ka Ye Hal Hai from the above link for free | Bazar Ka Ye Hal Hai is posted under following categories Knowledge, Stories, Novels & Plays |


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पुस्तक का साइज : 01.0 MB
कुल पृष्ठ : 98

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हमारे लाख मना करने पर भी हमारे घर के चक्कर काटता हुआ मिल गया भ्रष्टाचार हमने डाटा नहीं मानोगे यार तो बोला घलिए आपने हमे यार तो कहा अव आगे का काम हम संभाल लेगे आप हमको पाल लीजिए आपके बाल-बच्चों को हुम पाल लेगे हमने कहा भ्रष्टाचार जी ! किसी नेता या अफसर थे। भच्चे का पालना गौर बात है। इसान के बच्चे को पालना आसान नहीं है। वो बोला दो वक्त के साथ नहीं चलता इसान नही है मैं आज का बनते हैं। कलयुग की धमनियों में वह्ता हुआ रवन है कहने को काला हैं। मगर मेरे कई ग हैं।

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