भरतेश्वर – बाहुबलि रास | Bharateshwar – Bahubali Ras

भरतेश्वर – बाहुबलि रास | Bharateshwar – Bahubali Ras

भरतेश्वर – बाहुबलि रास | Bharateshwar – Bahubali Ras के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : भरतेश्वर – बाहुबलि रास है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Achary Jinvijay Muni | Achary Jinvijay Muni की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 11.03 MB है | पुस्तक में कुल 503 पृष्ठ हैं |नीचे भरतेश्वर – बाहुबलि रास का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | भरतेश्वर – बाहुबलि रास पुस्तक की श्रेणियां हैं : Poetry

Name of the Book is : Bharateshwar – Bahubali Ras | This Book is written by Achary Jinvijay Muni | To Read and Download More Books written by Achary Jinvijay Muni in Hindi, Please Click : | The size of this book is 11.03 MB | This Book has 503 Pages | The Download link of the book " Bharateshwar – Bahubali Ras" is given above, you can downlaod Bharateshwar – Bahubali Ras from the above link for free | Bharateshwar – Bahubali Ras is posted under following categories Poetry |


पुस्तक के लेखक :
पुस्तक की श्रेणी :
पुस्तक का साइज : 11.03 MB
कुल पृष्ठ : 503

Search On Amazon यदि इस पेज में कोई त्रुटी हो तो कृपया नीचे कमेन्ट में सूचित करें |
पुस्तक का एक अंश नीचे दिया गया है : यह अंश मशीनी टाइपिंग है, इसमें त्रुटियाँ संभव हैं, इसे पुस्तक का हिस्सा न माना जाये |

आपणने गुती भापाना जुन साईवना विशाळ होगइनी वास्तविक अने, थित ओळवाण तथा माळ आपनानं झगम मान सद्गत विद्वान् चमनलाल हालाभाई दल एम्. ए. ने प्राप्त थाय छै।ना साहित्पमिती सद्गव श्रीसयाजीप महारानी शायी, तैमने पाटणना न भंडारोतुं रुपस्थितरीते निरीक्षण बरानो परम सुयोग प्राप्त भयो; अने ते, पाटणना मैदाना असे उद्धार पुग्यपाद प्रत्यक मुनिर श्रीकांतिबिंजयजी महाराज तथा हेमना अन्न्य सहायक अने ज्ञानरक्षक सर्भस्थ शियर श्रीमुनि परनिजगजीं मारावनी विशिष्ट सहानुभूति गरेली इष्ट राहाताशी, सैगर्नु ए निरीक्षणकार्य अहु व सुंदररोते खळ एं। होमणे ए भंडारोनां छुपापी विशाळ साहिल संपत्ति सारा प्रमाम्म ब्यवस्थित गोंध क; अने ते उपरथी, सन् १९१५म भराएकी पांचमी गुजराती साहिला पारेप मास्ते एक विस्तृत निबंध तयार वये, जैम ‘पाटणना भंडारो अने खास करीने तेर्मा रहे अपभ्रंश तथा प्राचीन गुजराती साहित्य, दिपये पर गुर्जर, साक्षरोने बहुत विगतपूर्ण गने भिन्न प्रकाश जान्यो।

You might also like

Leave A Reply

Your email address will not be published.