ब्रह्माण्ड पुराण | Brahmand Puraan

ब्रह्माण्ड पुराण : वेद व्यास | Brahmand Puraan : Vedvyas |

ब्रह्माण्ड पुराण : वेद व्यास | Brahmand Puraan : Vedvyas | के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : ब्रह्माण्ड पुराण है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Ved Vyas | Ved Vyas की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 76 MB है | पुस्तक में कुल 893 पृष्ठ हैं |नीचे ब्रह्माण्ड पुराण का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | ब्रह्माण्ड पुराण पुस्तक की श्रेणियां हैं : dharm, hindu

Name of the Book is : Brahmand Puraan | This Book is written by Ved Vyas | To Read and Download More Books written by Ved Vyas in Hindi, Please Click : | The size of this book is 76 MB | This Book has 893 Pages | The Download link of the book "Brahmand Puraan" is given above, you can downlaod Brahmand Puraan from the above link for free | Brahmand Puraan is posted under following categories dharm, hindu |


पुस्तक के लेखक :
पुस्तक की श्रेणी : ,
पुस्तक का साइज : 76 MB
कुल पृष्ठ : 893

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पुराणों में यही अन्तिम पुराण है। उच्च कोटि के पुराण में इसे महत्य| पूर्ण स्थान प्राप्त है। इसकी प्रशंसा में पुराणकार यहाँ तक चले गये कि
उन्होंने इसे वेद के समान घोषित किया। इसका अभिप्राय यह हुआ कि पाठक जिस उद्देश्य की पूति के लिए वेद या अध्ययन करता है, उस तरह
को विषय सामग्री उसे यहाँ भी प्राप्त हो जाती है और वह जीवन को चतु| मुखी बना सकता है ।
| इस पुराण के पठन-पाठन, मनन-चिन्तन और अध्ययन की परम्परा भी प्रशंसनीय है । गुरु ने अपने शिष्यों में से इसका ज्ञान अपने योग्यतम शिष्य को उसका पात्र समझ कर दिया ताकि इसकी परम्परा अबाध गति
से निरन्तर चलती रहे । भगवान प्रजापति ने वसिष्ठ मुनि को, भगवान | वसिष्ठ ऋषि ने परम पुण्यमय अमृत के अदृश इस तत्व ज्ञान को शक्ति के | पुत्र अपने पौत्र पाराशर को दिया। प्राचीन काल में भगवान पाराशर ने | इस परम दिव्य ज्ञान को जातुकर्म्य ऋषि को, जातृकूर्म्य ऋषिने परम संयमी हैपायन को पड़ाय।। द्वैपायन ऋषि ने श्रुति के समान इस अद्भुत पुराण को अपने पांच शिष्यों जैमिनि, सुमन्तु, वैशम्पायन पेलब और लोमहर्षण को पढ़ाया। सूत परम विनम्र, धार्मिक और पवित्र थे। अतः उनको यह अद्भुत वृतान्त वाला पुराण पढ़ाया था। ऐसी मान्यता है कि सूतजी ने इस पुराण का श्रवण भगवान यास देव जी से किया था। इन परम ज्ञानी सुत जी ने ही नैमिषारण्य में महात्मा मुनियों को इस पुरा का प्रवचन किया था। वही ज्ञान आज हमारे सामने हैं।
पुराण का लक्षण है-सर्ग अर्थात् सृष्टि और प्रति सर्ग अर्थात् उस | सृष्टि से होने वाली सृष्टि, वंशों का वर्णन, मन्वन्तर अर्थात् मनुओं का
कथन । इसका तात्पर्य यह है कि कौन-कौन मनु किस-किस के पश्चात् हुए ! | वंशों में होने वालों का चरित यह ही पांचों बातों का होना पुराण का

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1 Comment
  1. rakesh says

    plz give me book

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