श्रीमद देवी भागवत पुराण हिंदी पुस्तक मुफ्त डाउनलोड करें | Shreemad Devi Bhagvat Puran Hindio Book Free Download

श्रीमद देवी भागवत पुराण हिंदी पुस्तक मुफ्त डाउनलोड करें | Shreemad Devi Bhagvat Puran Hindio Book Free Download

श्रीमद देवी भागवत पुराण हिंदी पुस्तक मुफ्त डाउनलोड करें | Shreemad Devi Bhagvat Puran Hindio Book Free Download के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : है | इस पुस्तक के लेखक हैं : | की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 48.83 MB है | पुस्तक में कुल 722 पृष्ठ हैं |नीचे का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | पुस्तक की श्रेणियां हैं : dharm, gita-press, hindu

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पुस्तक का साइज : 48.83 MB
कुल पृष्ठ : 722

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# जययुक्त श्रीदेवी अश्ेत्तर-सदस्रनाम + जययुक्त श्रीदेवी-अशेत्तर-सहसनाम जय हु दुर्गतिनाशिनि जय। जय मा कालविनाशिनि जय जय ॥ जयति शैलपुत्री मा जय जय। प्रप्मचारिणी माता जय जय ॥ जयति चम्द्रयण्दा मा जय जय। जय कूष्माण्डा श्कल्जननि लय ॥ जप मा कात्यायिनी जयति जय। जयति कालयघी मा जय जय ॥ जयति महागोंगी देवी जय। जयति सिद्धिदाची मा जय जय ॥ जय काली जय तारा जय जय । जय जगजननि पोडशी जय जय ॥ जय भुवनेश्वर माता जय जय। जयदि छिन्नमस्ता मा जय जय ॥ जयति सैरवी देवी जय जय। जय जय धूमावती जयति जय ॥ जय बंगला मातंगी जय जय। जयति जयति मां कमला जय जय ॥ जयति महाकाली मा जय जय । जयति माालक्ष्मी मां जय जय ॥ जय मा मदासरखति जय जय । उमा रमा प्राणी जय जय ॥ कौग्रेसी चारुणी जयति जप। जय कच्छपी नाएसिंद्दी जय ॥ जय मत्य्या फौमारी जय जय। जय बैष्णचीं वासवी जय जय ॥ जय मसाधव-मनवासिनि जय जय । फीर्ति। धक्षीर्तिः क्षमा करुणा जय ॥ छापा। माया तुष्टि पुष्टि जय । जयति फान्ति। जय श्रार्ति कषान्ति जय ॥ लयति घुद्धिः भ्रूति दूत्ति जयति जय । जयति छुधा दष्णा। प्रिया जय ॥ श्रीदेवीजीके १००८ नाम जय निद्ाः तन्द्वी अद्यान्ति जय । जय लज़ाः सजा श्रुति जय जय ॥ जय रखूति पस-साधना जय जय । जय श्रद्धा मेधा माला जय ॥ जय श्री भूमि दया। मोदा जय । मज़ा बसा त्वचा नाड़ी जय ॥ इच्छाः दाक्ति। भददक्ति शान्ति जय | पराः बैखरी पदय्ती जय ॥ मध्याः सत्यासत्या जय जय | चाणी मघुरा परुषा जय जय ॥ जएमुजा। दूशभुज्ञा जयति जय । अध्रादश शुभ भुजा जयति जय ॥ दुप्रदलनि बहुभुजा जयति जय | चतुमुखाः व्रहुमुखा जयति जय ॥ जय ददधावकत्रा। दृशपादा जय | जय त्रिशलोचना जयति जय ॥ द्विभुजाः चतुर्भुजा मा जय जय। जय कदम्बमाला। चन्द्रा जय ॥ जय प्रयुप्लजननि देवी जय। जय क्षीराणंव्रसुते जयति जय ॥ दारिद्रबाणघ-शोषिणि जय जय । सम्पति वेभव-पोषिणि जय जय ॥ दूयामयीः सुतहितकारिणि जय । पद्मावती माठती जय जय भीप्मकराजसुता धनदा जय। बिरजा रजा सुशीछा जय जय ॥ सकल सम्पदारूपा जय जय सदाप्रसन्ा शान्तिमपी जय ॥ श्रीपतिप्रिये पद्मलोचनि जय । हरिहियराजिनिः कान्तिमयी जय ॥ जयति मिरिसुता दैमबती जय। परमेशानि महेशानी जय ॥ प्‌ पमटयरयययरटटटटययययपटटपटटटाााााायाायययणणाणयणणणणनणणणणणणणणणणटनननटन--ननननननननचननन तनमेभधन लाल न सयटयपरवटदनयन्टनन्यानानकम्टन्कनकण्कनकम

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5 Comments
  1. Shiva M says

    thankuuuu….:)

  2. सुबोध दास सण्डीला हरदोई यूपी says

    यह पुस्तक डाउनलोड नही हो रही है

    1. admin says

      क्षमा चाहते हैं . पुस्तकों के लिंक कम नहीं कर रहे थे किन्तु अब लिंक अपडेट कर दिए गए हैं डाउनलोड करने में अब को दिक्कत नहीं आएगी

  3. Sourav says

    आपने बहुत बहुत घटिया,, काम कर दिया आपकी वजह। से इतनी बड़ी मुश्किल आ गई असली वाली देवी पुराण ,कुछ और और आपकी कुछ और दिमाग खराब कर दिया ऐसा क्यूं किया आपने ऐसा क्यूं किया,, पता कितनी मुश्किल आ गई,, धर्म कर्म, धार्मिक चीजों में बदलाव मत करो नहीं तो। पाप। लगेगा,,, इस बुक को आप अभी बिल्कुल असली वाली में लिखा वो लिखी बिल्कुल,, 1 भी शब्द बदलना नहीं,,,, या फिर आप इस ऐप को यहां से हटा दो।।।। ,, नुकसान हो जाएगा नहीं टी😡😡😡😡😡😡😡😡😡😡😡😡😡😡

    1. admin says

      श्रीमान आप क्रुद्ध हुए इसके लिए क्षमा चाहते हैं किन्तु यह पुस्तक गीता प्रेस (गोरखपुर) द्वारा सम्पादित की गयी है | जानकारी के लिए बता दें गीता प्रेस प्रामाणिक और विश्वसनीय पुस्तकों के लिए जनि जाती है |

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