धन्वन्तरि - शारीरांक भाग - १३ | Dhanvantri Sharirank Part-13

धन्वन्तरि – शारीरांक भाग – १३ | Dhanvantri Sharirank Part-13

धन्वन्तरि – शारीरांक भाग – १३ | Dhanvantri Sharirank Part-13 के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : धन्वन्तरि - शारीरांक भाग - १३ है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Ramprasad | Ramprasad की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 25.86 MB है | पुस्तक में कुल 326 पृष्ठ हैं |नीचे धन्वन्तरि - शारीरांक भाग - १३ का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | धन्वन्तरि - शारीरांक भाग - १३ पुस्तक की श्रेणियां हैं : ayurveda, health

Name of the Book is : Dhanvantri Sharirank Part-13 | This Book is written by Ramprasad | To Read and Download More Books written by Ramprasad in Hindi, Please Click : | The size of this book is 25.86 MB | This Book has 326 Pages | The Download link of the book "Dhanvantri Sharirank Part-13" is given above, you can downlaod Dhanvantri Sharirank Part-13 from the above link for free | Dhanvantri Sharirank Part-13 is posted under following categories ayurveda, health |


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पुस्तक का साइज : 25.86 MB
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परन्तु प्राचीनकाल में कोई कार्य अयोग्यों के हाथ नहीं रहता था। प्रारम्भ चाहे कोई करता मगर आगे गाड़ी उसी की बढ़ती थी जो अपने कार्य के योग्य, विज्ञ और अनुभवी सिद्ध होता था। उसी के गुणों की कीर्ति फैलती थी। शेप अनधिकारी-अज्ञानी- अपने आप चुप हो रहते थे। आज दशा इसके ३ विपरीत है। जो ज्ञान-गम्भीर है, वह तो चुपचाप - अपनी कुटिया में बैठा रहता है ।

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