धर्म जीवन जीने की कला | Dharm Jivan Jine Ki Kala

धर्म जीवन जीने की कला | Dharm Jivan Jine Ki Kala

धर्म जीवन जीने की कला | Dharm Jivan Jine Ki Kala के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : धर्म जीवन जीने की कला है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Satyanarayan Goyanka | Satyanarayan Goyanka की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 10.7 MB है | पुस्तक में कुल 118 पृष्ठ हैं |नीचे धर्म जीवन जीने की कला का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | धर्म जीवन जीने की कला पुस्तक की श्रेणियां हैं : dharm

Name of the Book is : Dharm Jivan Jine Ki Kala | This Book is written by Satyanarayan Goyanka | To Read and Download More Books written by Satyanarayan Goyanka in Hindi, Please Click : | The size of this book is 10.7 MB | This Book has 118 Pages | The Download link of the book "Dharm Jivan Jine Ki Kala" is given above, you can downlaod Dharm Jivan Jine Ki Kala from the above link for free | Dharm Jivan Jine Ki Kala is posted under following categories dharm |


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पुस्तक का साइज : 10.7 MB
कुल पृष्ठ : 118

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इस तरह की पुस्तक की आवश्यकता पूज्य गोयन्काजी ने भी महसूस की किन्तु ध्यान शिविरों की व्यस्तता के कारण लेखों का चयन तथा संशोधन करना सम्भव नहीं हो सका था। वैसे ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित होने वाली मासिक पत्रिका 'विपश्यना' में पूज्य गोयन्काजी के उद्बोधन व लेख प्रसिद्ध होते रहे हैं और उनका साधकों को लाभ भी मिलता रहा, पर साधना की पाश्र्वभूमि ठीक से समझ में आवे ऐसा संग्रह पुस्तक रूप में निकलने के लिए उसे देखकर सिलसिलेवार तैयार करने के लिए समय नहीं निकल पाया था। किन्तु पूज्य गुरुजी की बीमारी के बाद विश्राम के समय उन्होंने ‘धर्म जीवन जीने की कला' अपने पुराने लेखों तथा नये लेख लिखकर यह पुस्तक तैयार करने की कृपा की।

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