धर्मकोश राजनीती कांड भाग-1 | Dharmkosh Rajniti Kand Bhag-1

धर्मकोश राजनीती कांड भाग-1 | Dharmkosh Rajniti Kand Bhag-1

धर्मकोश राजनीती कांड भाग-1 | Dharmkosh Rajniti Kand Bhag-1 के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : धर्मकोश राजनीती कांड भाग-1 है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Swami Shri Akhandanand | Swami Shri Akhandanand की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 122 MB है | पुस्तक में कुल 552 पृष्ठ हैं |नीचे धर्मकोश राजनीती कांड भाग-1 का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | धर्मकोश राजनीती कांड भाग-1 पुस्तक की श्रेणियां हैं : history, politics

Name of the Book is : Dharmkosh Rajniti Kand Bhag-1 | This Book is written by Swami Shri Akhandanand | To Read and Download More Books written by Swami Shri Akhandanand in Hindi, Please Click : | The size of this book is 122 MB | This Book has 552 Pages | The Download link of the book "Dharmkosh Rajniti Kand Bhag-1 " is given above, you can downlaod Dharmkosh Rajniti Kand Bhag-1 from the above link for free | Dharmkosh Rajniti Kand Bhag-1 is posted under following categories history, politics |


पुस्तक के लेखक :
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पुस्तक का साइज : 122 MB
कुल पृष्ठ : 552

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४८ अश्विनौ राजानौ भिषक्तमौ विशां प्रशासकौ, ताभ्यां कृतानि कर्माणि- प्रसवासमर्था धेनुः पयसा पूरिता, वायुः शीघ्रगामी त्रिमन्तुर्विचक्षणश्च कृतः, रेभवन्दनौ उदकादुद्धत्य पाशेभ्यः मोचितौ, नश्यमाना अन्तकवय्यादयोऽगाधजलात् तारिताः, अत्रिदहात् पुरुकुत्सादयो दारिद्याच्च रक्षिताः, अन्धः पङ्गुश्च परावृट् चक्षुष्मान् गमनक्षमश्च कृतः, वृकग्रस्ता वर्तिका मोचिता, सिन्धुर्नदी मधुमती प्रवाहिता रसा च नदी जलेन पूरिता, विश्पली स्त्री युद्धे रक्षिता, दीर्घश्रवा औशिजो वणिक् मधुसंपन्नः कृतः, मन्धाता क्षेत्रपतिः कलिश्च प्राप्तभार्यः कृतः, त्रिशोकं नष्टा गावो लम्भिताः

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