हिंदी साहित्य : एक रेखा चित्र हिन्दी पुस्तक | Hindi Sahitya : Ek Rekha Chitra Hindi Book

हिंदी साहित्य : एक रेखा चित्र हिन्दी पुस्तक | Hindi Sahitya : Ek Rekha Chitra Hindi Book

हिंदी साहित्य : एक रेखा चित्र हिन्दी पुस्तक | Hindi Sahitya : Ek Rekha Chitra Hindi Book के बारे में अधिक जानकारी :

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पुस्तक का साइज : 22.57 MB
कुल पृष्ठ : 270

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भूमिका के नाम पर इतिहास के पाषाणी शिखरों को मैने चॉँदनी में देखा है--हृदय की शाँखों से । इसलिए खंड की बारीकियों के प्रति विशेष झ्याग्रह नहीं । संपूरां की महिमा को उभार कर रखने की कोशिश मैंने जरूर की है । रेखाएँ कहीं भी कल नहीं धूमिल नहीं--हर शिखर का स्वरूप स्पष्ट है । तथ्यों को भरसक विकृत नहीं होने दिया है उन्हें चित्रों में ढाल देने की कोशिश भर की है। इसे हिंदी-साहित्य का रेखाचित्र कह लीजिए । हाँ भावुकता में भींग कर रेखाएँ जरा रंगीन हो उठी हैं । जाने-झनजाने उन्हें सरस बना डालने का अपराध मैं कर बेठा हूँ। पर अपराध खूबसूरत है मौलिक भी । शायद श्यापको भा जाए । पर साहित्य के इतिहास को सूखा शास्र बना डालनेवाले ज्ञानी क्‍या चामा कर सकेंगे १ कविता कहानी शब्दचित्र नाटक और आलोचना--इन सब में थोड़ी-बहुत रुचि रही दै । इसीलिए इतिहास लिखने को जब मेरे ्यालोचक ने कलम उठाई कविता और कहानी मान कर बैठीं शब्दचित्र और नाटक मचल उठे। मैं किस-किस को रोकता? सभी समा गए और उनके सुखद समन्वय से रंगों और रसों का एक मोहक इंद्रजाल-सा तैयार हो गया । पर साहित्य को मैं मात्र मनोरंजन की सामग्री नहीं मानता । वह कुरूपताओं के खिलाफ संधष करनेवाले मानव के हाथ का सबसे बड़ा श्र । जन-कल्याण के साथ जहाँ-कहीं उसने गद्दारी की है मुझे शर्म झाई है दृष्टिकोण की इस लाचारी के कारण ही मेरी तटस्थता खैडित हो गई है। पर अपनी इस लाचारी पर मुभे अफसोस नहीं ।

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