जीवन वृत्तान्त | Jeevan Vrattant

जीवन वृत्तान्त | Jeevan Vrattant

जीवन वृत्तान्त | Jeevan Vrattant के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : जीवन वृत्तान्त है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Jasbir Singh | Jasbir Singh की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 268.3 KB है | पुस्तक में कुल 31 पृष्ठ हैं |नीचे जीवन वृत्तान्त का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | जीवन वृत्तान्त पुस्तक की श्रेणियां हैं : dharm

Name of the Book is : Jeevan Vrattant | This Book is written by Jasbir Singh | To Read and Download More Books written by Jasbir Singh in Hindi, Please Click : | The size of this book is 268.3 KB | This Book has 31 Pages | The Download link of the book "Jeevan Vrattant " is given above, you can downlaod Jeevan Vrattant from the above link for free | Jeevan Vrattant is posted under following categories dharm |


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पुस्तक का साइज : 268.3 KB
कुल पृष्ठ : 31

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आप सनातनी हिन्दु थे किन्तु आपके हृदय की अवस्था सदैव सत्य की खोज में रहती थी । आप परम्परागत प्रचलित धार्मिक कर्मकाण्ड, जप-तप, दान-पुण्य, तीर्थ स्नान, शुभ-अशुभ, जाति-पाति, ऊँच-नीच में पूर्ण विश्वास नहीं बना पा रहे थे परन्तु विरासत में मिले इन कर्मों को करके कुछ प्राप्ति करना चाहते थे जब आप इन कर्मों से ऊब गये तो आपने 40 वर्ष की आयु में किसी पूर्ण ज्ञानी पुरूष की खोज में प्रत्येक वर्ष आँगा स्नान के बहाने हरिद्वार जाना प्रारम्भ किया। आपको विश्वास था कि कभी न कभी ऐसे महापुरूष से अवश्य ही भेट होगी जो उनको शाश्वत ज्ञान प्रदान करेगा। आपकी दृष्टि हरिद्वार में प्रत्येक वर्ष किसी सतपुरूष की खोज में रहती । किन्तु आपकी कसौटी पर कोई सन्यासी, योगी, संत, ऋषि खरा न उतरता, आपने भी खोज जारी रखी ।

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