कबीर की भाषा | Kabir Ki Bhasha

कबीर की भाषा | Kabir Ki Bhasha

कबीर की भाषा | Kabir Ki Bhasha के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : कबीर की भाषा है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Matabadal Jayasabal | Matabadal Jayasabal की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 5.72 MB है | पुस्तक में कुल 284 पृष्ठ हैं |नीचे कबीर की भाषा का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | कबीर की भाषा पुस्तक की श्रेणियां हैं : Stories, Novels & Plays

Name of the Book is : Kabir Ki Bhasha | This Book is written by Matabadal Jayasabal | To Read and Download More Books written by Matabadal Jayasabal in Hindi, Please Click : | The size of this book is 5.72 MB | This Book has 284 Pages | The Download link of the book "Kabir Ki Bhasha" is given above, you can downlaod Kabir Ki Bhasha from the above link for free | Kabir Ki Bhasha is posted under following categories Stories, Novels & Plays |


पुस्तक के लेखक :
पुस्तक की श्रेणी :
पुस्तक का साइज : 5.72 MB
कुल पृष्ठ : 284

Search On Amazon यदि इस पेज में कोई त्रुटी हो तो कृपया नीचे कमेन्ट में सूचित करें |
पुस्तक का एक अंश नीचे दिया गया है : यह अंश मशीनी टाइपिंग है, इसमें त्रुटियाँ संभव हैं, इसे पुस्तक का हिस्सा न माना जाये |

हिन्दी भाषा और साहित्य के इतिहाग में महात्मा कोर एक अद्भुत किंव लेकर अवतरित हुए हैं। मसि-कानद और शेव्रनो का स्पर्श न करने पर भी हिन्दी भारती के मन्दिर में तुलसी, सूर के पश्चात् उन्हीं को बासन दिया जाता है। हिन्दी माहित्य में संभवत: कवीर ही पहले कमि हैं जो संस्कार कूप-जल में हुड कर सासपूर्वक भाषापी बहूते गौर के पास करने के लिए लोक समुधाय को मार्गत्रित करते हैं। काव्य-फा की दृष्टि से भले कीर को भावः कायोचित अधवा अलंकृत हैं हौ किन्तु भाषावैज्ञानिक दृष्टि से क्योर को माया अत्यन्त मुळीं है।

You might also like

Leave A Reply

Your email address will not be published.