कल जो मैंने कहा था | Kal Jo Maine Kaha Tha

कल जो मैंने कहा था : मत्स्येन्द्र शुक्ल | Kal Jo Maine Kaha Tha : MATSYAENDRA SHUKL |

कल जो मैंने कहा था : मत्स्येन्द्र शुक्ल | Kal Jo Maine Kaha Tha : MATSYAENDRA SHUKL | के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : कल जो मैंने कहा था है | इस पुस्तक के लेखक हैं : MATSYAENDRA SHUKL | MATSYAENDRA SHUKL की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 5.2 MB है | पुस्तक में कुल 168 पृष्ठ हैं |नीचे कल जो मैंने कहा था का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | कल जो मैंने कहा था पुस्तक की श्रेणियां हैं : Poetry, Uncategorized

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पुस्तक का साइज : 5.2 MB
कुल पृष्ठ : 168

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महल से विदाई लेकर जब चले थे शैतान कहा गया था | तब उनसे | चेतावनी के नहजे में ऊँचे मकानों को कर देना जमीन के बराबर आदमी जहाँ | जिस रूप में दिखे उसे वही समाप्त कर देना | जब रंग-ही न होगा तब कौन उठायेगा रंग-भेद का सवाल
जाओ / हवा की तरह तत्काल पहुँच जाओ उसुक दो विरोधियों की खाल फिर क्या / समुद्र में तैर चलीं असंख्य पनडवियाँ हुवा और समुद्र धबड़ा गये | महाक्रान्ति के लक्षण से

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