कालीदास की लालित्य – योजना | Kalidas Ki Lalitya – Yojana

कालीदास की लालित्य – योजना | Kalidas Ki Lalitya – Yojana

कालीदास की लालित्य – योजना | Kalidas Ki Lalitya – Yojana के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : कालीदास की लालित्य – योजना है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Acharya Hazari Prasad Dwivedi | Acharya Hazari Prasad Dwivedi की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 10.24 MB है | पुस्तक में कुल 172 पृष्ठ हैं |नीचे कालीदास की लालित्य – योजना का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | कालीदास की लालित्य – योजना पुस्तक की श्रेणियां हैं : literature

Name of the Book is : Kalidas Ki Lalitya – Yojana | This Book is written by Acharya Hazari Prasad Dwivedi | To Read and Download More Books written by Acharya Hazari Prasad Dwivedi in Hindi, Please Click : | The size of this book is 10.24 MB | This Book has 172 Pages | The Download link of the book " Kalidas Ki Lalitya – Yojana " is given above, you can downlaod Kalidas Ki Lalitya – Yojana from the above link for free | Kalidas Ki Lalitya – Yojana is posted under following categories literature |


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पुस्तक का साइज : 10.24 MB
कुल पृष्ठ : 172

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कालिदास कब इस देश में उत्पन्न हुए, इस विषय में पंडितों में मतभेद है । परम्पराक्रम से उन्हें सन् ईसवी के पूर्व की प्रथम शताब्दी का कवि माना जाता है परन्तु आधुनिक विद्वान उन्हें गुप्तकाल का कवि मानने लगे हैं । यद्यपि उनके समय, जन्म स्थान, कुल-गोत्र आदि के बारे में विद्वानों में बहुत भतभेद हैं पर इस बात से किसी का मतभेद नहीं है कि वे हमारे देश के शीर्षस्थानीय कवियों में हैं । वाल्मीकि और व्यास के बाद सेतु हिमाचल जो कवि सबसे अधिक सम्मान-भाजन है वह कालिदास ही हैं। नये और पुराने प्रलोचक उन्हें निश्चित रूप से भारत का श्रेष्ठ कवि मानते हैं। उनके सात ग्रन्थ प्रामाणिक माने गए। हैं जिनमें तीन नाटक हैं और चार काव्य । तीन नाटकों के नाम हैं-मालविकाग्निमित्र, विक्रमोर्वशीय, अर अभिज्ञानशाकुन्तल । चार काव्य हैं-ऋतुसंहार, मेघदूत, रघुवंश और कुमारसंभव । कुमारसंभव के केवल आठ सर्ग ही प्रामाणिक समझे जाते हैं । इन नाटकों और काव्यों में कालिदास ने भारतवर्ष की समूची साधना का निचोड़ रख दिया है। संपूर्ण भारतवर्ष इनका सम्मान करता है।

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