खून का टीका | Khun Ka Teeka

खून का टीका | Khun Ka Teeka

खून का टीका | Khun Ka Teeka के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : खून का टीका है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Yadvendra Sharma ‘Chandra’ | Yadvendra Sharma ‘Chandra’ की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 5 MB है | पुस्तक में कुल 204 पृष्ठ हैं |नीचे खून का टीका का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | खून का टीका पुस्तक की श्रेणियां हैं : Stories, Novels & Plays

Name of the Book is : Khun Ka Teeka | This Book is written by Yadvendra Sharma ‘Chandra’ | To Read and Download More Books written by Yadvendra Sharma ‘Chandra’ in Hindi, Please Click : | The size of this book is 5 MB | This Book has 204 Pages | The Download link of the book "Khun Ka Teeka" is given above, you can downlaod Khun Ka Teeka from the above link for free | Khun Ka Teeka is posted under following categories Stories, Novels & Plays |


पुस्तक के लेखक :
पुस्तक की श्रेणी :
पुस्तक का साइज : 5 MB
कुल पृष्ठ : 204

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हम्मीर ने अन्त में उठकर कहा, "प्रियजनो और मेवाड़ के रक्षको राय के विरुद्ध नहीं जा सकता हैं। लेकिन मुझे चरण जी की क बात स्मरण हो आई है। व्यर्थ का रक्तपात ही हिसा होती है । शत्रु आहत है अथवा हमारे बन्दीगृह मे है, उन्हें मृत्यु का दडे देना, न्याय-संगत प्रतीत नहीं होता। राजपूत सदा धर्म-युद्ध करता आया है। वह उसे भी धागा कर देता है जो उसका घातक होता है । मैं चाहता हूँ। कि चित्तौड़ की स्थिति निरन्तर युद्ध के कारण अत्यन्त क्षीण हो गई है। मेरी आपसे विनती है कि आप मुहम्मद तुगलक को मृत्यु दड न देकर अर्थ-दर्द दें। जिससे हम चित्तौड और समस्त मेवाड का पुर्वोत्यान कर सकगे।

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