महन्त अवेद्यनाथ भाग -३ | Mahant Avedyanath Part-3

महन्त अवेद्यनाथ भाग -३ | Mahant Avedyanath Part-3

महन्त अवेद्यनाथ भाग -३ | Mahant Avedyanath Part-3 के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : महन्त अवेद्यनाथ भाग -३ है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Sadanand Prasad Gupta | Sadanand Prasad Gupta की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 140.6 MB है | पुस्तक में कुल 703 पृष्ठ हैं |नीचे महन्त अवेद्यनाथ भाग -३ का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | महन्त अवेद्यनाथ भाग -३ पुस्तक की श्रेणियां हैं : dharm, Social

Name of the Book is : Mahant Avedyanath Part-3 | This Book is written by Sadanand Prasad Gupta | To Read and Download More Books written by Sadanand Prasad Gupta in Hindi, Please Click : | The size of this book is 140.6 MB | This Book has 703 Pages | The Download link of the book "Mahant Avedyanath Part-3" is given above, you can downlaod Mahant Avedyanath Part-3 from the above link for free | Mahant Avedyanath Part-3 is posted under following categories dharm, Social |


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पुस्तक का साइज : 140.6 MB
कुल पृष्ठ : 703

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१Tारतीय धार्मिक-सांस्कृतिक चिन्तनधारा की अविच्छिन्न परम्परा में नाथपन्थ का महत्त्वपूर्ण स्थान है। यह भारतीय इतिहास की वह प्रबल धारा है, जो भारतवर्ष में अखण्ड रूप से कई शताब्दियों तक प्रवाहित होती रही तथा जिसने विभिन्न साधना पद्धतियों और साहित्य की धाराओं को प्रभावित किया। इतिहासविदों ने नाथपन्थ को बौद्धों की वज्रयान शाखा से सम्बद्ध माना है; किन्तु योगिराज गोरखनाथ ने उसे वज्रयान शाखा से निकालकर एक परिष्कृत रूप दिया तथा उसे व्यवस्थित किया। नाथ सम्प्रदाय में गोरखनाथ को शिव के अवतार के रूप में मान्यता है, पर ऐतिहासिक दृष्टि से उनका समय नवीं-दसवीं शताब्दी माना जाता है।

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