मेरा जादुई स्कूल | My Magical School

मेरा जादुई स्कूल : डॉ अभय बंग | My Magical School : Dr Abhay Bang

मेरा जादुई स्कूल : डॉ अभय बंग | My Magical School : Dr Abhay Bang के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : मेरा जादुई स्कूल है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Arvind Gupta | Arvind Gupta की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 500 KB है | पुस्तक में कुल 20 पृष्ठ हैं |नीचे मेरा जादुई स्कूल का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | मेरा जादुई स्कूल पुस्तक की श्रेणियां हैं : children, education

Name of the Book is : My Magical School | This Book is written by Arvind Gupta | To Read and Download More Books written by Arvind Gupta in Hindi, Please Click : | The size of this book is 500 KB | This Book has 20 Pages | The Download link of the book "My Magical School" is given above, you can downlaod My Magical School from the above link for free | My Magical School is posted under following categories children, education |


पुस्तक के लेखक :
पुस्तक की श्रेणी : ,
पुस्तक का साइज : 500 KB
कुल पृष्ठ : 20

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मैं एक अनूठे स्कूल में पढ़ा था। वैसी शिक्षा मैं आज अपने बेटे आनंद को नहीं दे सकता हूं। यह मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा दुख है।"मेरे बचपन की बात ही कुछ निराली थी। अब वह बात कहां रही।'' अक्सर बड़े-बूढ़ों को आपने इस प्रकार की टिप्पणी करते सुना होगा। फिर भी मेरे दिल में गहरा
दुख है। आखिर मेरे स्कूल में ऐसी क्या खास बात थी? नवीं तक मेरी पढाई गांधी जी की नई तालीम पद्धति के अनुसार हुई । उसमें से चार पूरे साल तो मैंने सेवाग्राम । आश्रम के नई तालीम विद्यालय में बिताए। शिक्षा का मतलब यह नहीं कि हम प्रकृति को छोड़ कर, कक्षा की चारदीवारों के बीच कैद होकर, किसी उबाऊ पाठ्यक्रम को रटें। इसके विपरीत, गांधीजी की नई तालीम का तो यह मानना था कि प्रकृति के करीब रहकर और समाज उपयोगी काम कर के ही बुद्धि का विकास होगा और इनके द्वारा बच्चे अनेक कुशलतायें हासिल करेंगे। इस पद्धति के विकास के लिए गांधीजी के आग्रह पर रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने शान्तिनिकेतन से श्री आर्यनायकम और श्रीमती आशा देवी की सिंहली-बंगाली जोड़ी को सेवाग्राम भेजा था। इसी । वज़ह से गांधीजी की शिक्षण पद्धति को रवीन्द्रनाथ का प्रकृति और कला प्रेम मिल पाया। स्कूल की शुरुआत से ही मेरे माता-पिता इस प्रयोग में शामिल थे। इस स्कूल के पढ़ाई के तरीके एकदम नायाब थे। उन तरीकों के कुछ उदाहरण मैं यहां पेश कर रहा हूं।

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