नया सहिया नये प्रश्न | Naya Sahitya Naye Prashn

नया सहिया नये प्रश्न | Naya Sahitya Naye Prashn

नया सहिया नये प्रश्न | Naya Sahitya Naye Prashn के बारे में अधिक जानकारी :

इस पुस्तक का नाम : नया सहिया नये प्रश्न है | इस पुस्तक के लेखक हैं : Nand Dulare Vajpeyi | Nand Dulare Vajpeyi की अन्य पुस्तकें पढने के लिए क्लिक करें : | इस पुस्तक का कुल साइज 28 MB है | पुस्तक में कुल 295 पृष्ठ हैं |नीचे नया सहिया नये प्रश्न का डाउनलोड लिंक दिया गया है जहाँ से आप इस पुस्तक को मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं | नया सहिया नये प्रश्न पुस्तक की श्रेणियां हैं : literature

Name of the Book is : Naya Sahitya Naye Prashn | This Book is written by Nand Dulare Vajpeyi | To Read and Download More Books written by Nand Dulare Vajpeyi in Hindi, Please Click : | The size of this book is 28 MB | This Book has 295 Pages | The Download link of the book "Naya Sahitya Naye Prashn " is given above, you can downlaod Naya Sahitya Naye Prashn from the above link for free | Naya Sahitya Naye Prashn is posted under following categories literature |


पुस्तक के लेखक :
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पुस्तक का साइज : 28 MB
कुल पृष्ठ : 295

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दर्शन, नई भावधारा, नूतन कल्पना-छवियो और अभिनव भाषा-रूपो को देखकर में इनकी ओर आकृष्ट हुआ था। इनके जीवन-दर्शन मे मानवीय आदर्शों की एक संपूर्णता थी, इनकी भावधारा में गाभीर्य था, इनकी कल्पना-छवियाँ निसर्गजात, समग्र और एकतान थी तथा इनके भाषारूप एक चमकती हुई मोहक लाक्षणिकता लिए हुए थे। इन तत्वो ने मुझे इतना आकृष्ट किया कि दूसरे कवि और दूसरी शैलियाँ मुझे अनाकर्षक लगने लगी। 'रत्नाकर' को, उनकी सारी विशेषताओं के साथ, मैने ताख पर रख दिया। उनकी 'विथकानी' और 'बिलः लानी मुद्राएँ मुझे असामयिक जान पड़ने लगी। मैथिलीशरण गुप्त के प्रति मेरे।

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